बसंत पंचमी का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व : आशीष अम्बर

बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की आराधना की जाती है । बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पावन, उल्लासपूर्ण और प्रेरणादयक पर्व है । यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और ऋतुराज बसंत के आगमन का प्रतीक है । बसंत को ऋतुओं का राजा कहा गया है क्योंकि यह न केवल प्रकृति को नवजीवन देता है बल्कि मानव मन में भी नई ऊर्जा , उत्साह और आशा का संचार करता है । इस समय सर्दी की कठोरता समाप्त होकर वातावरण में मधुरता और सौम्यता आ जाती है । पेड़ों पर नई कोंपले फूटती है , खेतों में सरसों के पीले – पीले फूल खिल उठते हैं और चारों ओर जीवन का सुखद उल्लास दिखाई देता है ।

बसंत पंचमी का संबंध विशेष रूप से माँ सरस्वती से है , जिन्हें विद्या, बुद्धि , संगीत , कला और वाणी की देवी माना जाता है । इस दिन घर – घर और विद्यालयों में सरस्वती पूजा की जाती है । विद्यार्थी अपनी पुस्तकों, कलम , वाद्य यंत्रों और अध्ययन सामग्री की पूजा कर ज्ञान, विवेक और सफलता की कामना करते हैं । अनेक स्थानों पर छोटे बच्चों का विधारंभ संस्कार इसी दिन कराया जाता है, जिससे उनके जीवन में शिक्षा का शुभारंभ हो सके । यह पर्व यह संदेश देता है कि ज्ञान ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धन है ।

इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है । पीला रंग ज्ञान , ऊर्जा, प्रकाश, समृद्धि और आनंद का प्रतीक माना जाता है । लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं । यह रंग प्रकृति में खिली सरसों और बसंती वातावरण को दर्शाता है, जो जीवन में आशा और प्रसन्नता भर देता है ।
बसंत पंचमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं , बल्कि हमारी सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपराओ से भी जुड़ी हुई है । प्राचीन काल से ही इस दिन कवि, लेखक और कलाकार अपनी रचनात्मक साधना आरंभ करते रहें हैं । कई स्थानों पर संगीत, नृत्य और काव्य गोष्ठियों का आयोजन होता है । यह दिन रचनात्मक सौन्दर्य और कला के प्रति प्रेम को जागृत करता है ।
कृषि संस्कृति में भी बसंत पंचमी का विशेष स्थान है । यह समय फसलों के पकने और नई आशाओं के जन्म का होता है । किसान इस पर्व को प्रसन्नता और कृतज्ञता के साथ मनाते हैं, क्योंकि यह आने वाली समृद्धि का संकेत देता है ।
इस प्रकार बसंत पंचमी हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य , ज्ञान के महत्व और सृजनशील जीवन जीने की प्रेरणा देती है । यह पर्व भारतीय संस्कृति की गहराई , उसकी आध्यात्मिक चेतना और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का सुन्दर प्रतीक है ।

आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार

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