भारतीय संस्कृति पर्व और त्योहार भारत को अद्वितीय और अद्भुत बनाते हैं। ये भारत को विशिष्ट पहचान देते हैं और इसमें भारतीयता झलकती है। राम और कृष्ण भारतीय संस्कृति की आत्मा है और सनातन के प्राण है। सनातन धर्म और संस्कृति जितनी प्राचीन है उतनी ही शास्वत और अर्वाचीन भी है।
भारतीय त्योहार विविधता को समाप्त कर समाज को एकता के सूत्र में बांधते हैं। विभेद को समाप्त करते है। उदाहरण के लिए अभी छठमहापर्व का समय है। वैसे तो यह पर्व बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों द्वारा ही मुख्य तौर से मनाया जाता है लेकिन ये लोग भारत के जिस भाग में बसे वहां छठ पर्व विस्तार होता गया और अब इसका चरित्र राष्ट्रीय हो गया है।अन्य त्योहार की भाँति इसमे भी क्षेत्र भाषा जाति औऱ धर्म की सभी सीमाएं समाप्त हो चुकी हैं। छठ घाट पर कोई जाति धर्म या क्षेत्र नहीं पूछता सब लोग एक साथ सुर्यास्त एवं सूर्योदय के समय अर्ध्य देते हैं और मिलकर प्रसाद का आनंद लेते है।यहां विविधता और विभेद समाप्त हो जाता है और एकरूपता एकता सामने आती है। ऐसा अन्य पर्व एवं त्योहार में भी समान रूप से प्रदर्शित होता है।
डॉ स्नेहलता द्विवेदी
उत्क्रमित कन्या मध्य विद्यालय शरीफगंज कटिहार
