अजनबी से अपनापन : रिन्जु कुमारी 

रवि दिल्ली जाने के लिए रेलवे स्टेशन पर खड़ा था। भीड़ इतनी थी कि पैर रखने की जगह नहीं मिल रही थी। अचानक उसका पैर फिसला और वह गिरने ही वाला था कि एक युवक ने हाथ पकड़कर उसे संभाल लिया।

रवि ने धन्यवाद दिया और दोनों बात करने लगे। युवक का नाम था अजय। बातचीत में पता चला कि दोनों एक ही गाँव के आस-पास के रहने वाले हैं, लेकिन कभी मिले नहीं थे। ट्रेन में सफर करते हुए दोनों ने एक-दूसरे की परेशानियाँ, सपने और परिवार की बातें साझा कीं।

यात्रा खत्म होते-होते रवि और अजय को लगा कि वे बरसों से एक-दूसरे को जानते हों। उसी दिन से दोनों ने तय किया कि वे एक-दूसरे की हर परिस्थिति में मदद करेंगे।

समय बीता। एक दिन रवि बीमार पड़ गया और उसका परिवार परेशान हो गया। सबसे पहले मदद को अजय ही पहुँचा। दूसरी ओर जब अजय का व्यापार डूबने लगा तो रवि ने उसे फिर से खड़ा होने में मदद की।

धीरे-धीरे उनका रिश्ता इतना गहरा हो गया कि लोग कहते –

“ये दोनों दोस्त नहीं, बल्कि भाई हैं।”

नैतिक शिक्षा:

सच्ची दोस्ती खून के रिश्तों से भी बड़ी होती है। जीवन में कभी भी, कहीं भी कोई मिल सकता है और वही आपका जन्म-जन्मांतर का साथी बन सकता है।

नाम- रिन्जु कुमारी 

प्राथमिक विद्यालय पासवान टोला किरकिचिया, फॉरबीसगंज , अररिया

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