समाज में बुजुर्गों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है।महाभारत के उद्योगपर्व में कहा गया है।-अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन:।चत्वारि तस्य वर्द्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम्।।(घर के बड़े-बुजुर्गों की सेवा से आयु, विद्या, यश और… समाज में बुजुर्गों का स्थान : गिरीन्द्र मोहन झाRead more
Author: Aastha Deepali
गणतंत्र दिवस के मायने : आशीष अम्बर
हर साल 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस (REPUBLIC DAY) मानते है। इस दिन को देश भर में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। इसे पहली बार 26 जनवरी,… गणतंत्र दिवस के मायने : आशीष अम्बरRead more
टीचर्स ऑफ बिहार : शिक्षकों की शक्ति से बदलता बिहार : मनु कुमारी
टीचर्स ऑफ बिहार आज बिहार का सबसे बड़ा और सशक्त लर्निंग प्लेटफॉर्म बन चुका है, जिसने शिक्षकों की प्रतिभा, परिश्रम और नवाचार को पहचान देने का ऐतिहासिक कार्य किया है।… टीचर्स ऑफ बिहार : शिक्षकों की शक्ति से बदलता बिहार : मनु कुमारीRead more
खुशियों का गुल्लक : रूचिका
दस वर्षीय राहुल मेले से खरीदे गुल्लक में रोज सिक्के डालता था। कभी 1₹, कभी 2₹, कभी 5₹, कभी 10₹। मतलब जब जितना उसे मिल जाए उतने पैसे वह गुल्लक… खुशियों का गुल्लक : रूचिकाRead more
सिरपंचमी का हल : अरविंद कुमार
गुनगुनी धूप, मंद हवा, मौसम का नशा प्रेम की अगन को और भड़काता है। यौवन अंगड़ाई लेने लगती हैं। तापमान न अधिक ठंडा, न अधिक गर्म। सुहाना समय चारों ओर… सिरपंचमी का हल : अरविंद कुमारRead more
चिंतन का विषय – शिक्षा व्यवस्था : ओम प्रकाश
अंग्रेज़ी शासन काल में भारत की शिक्षा व्यवस्था को जिस उद्देश्य के साथ गढ़ा गया था, उसमें शिक्षा को व्यापक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाने के बजाय प्रशासनिक आवश्यकताओं से… चिंतन का विषय – शिक्षा व्यवस्था : ओम प्रकाशRead more
प्रथम भारतीय महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले : हर्ष नारायण दास
सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 ईस्वी को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगॉंव में हुआ था।इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था।वे स्वयं… प्रथम भारतीय महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले : हर्ष नारायण दासRead more
रेनुअल न्यू ईयर : अरविंद कुमार
“ना अब उ सब काम नहीं करेंगे…। बिल्कुल नहीं……..। एकदम कन्ट्रोल…।” दफ्तर के बड़ा बाबू रमेश वर्मा मन ही मन बुदबुदा रहे थे। हालांकि वो हर साल नव वर्ष पर… रेनुअल न्यू ईयर : अरविंद कुमारRead more
शीशे वाली लड़की (डर से आत्मविश्वास तक की यात्रा) : अवधेश कुमार
करिश्मा नाम की एक लड़की थी, जो पढ़ाई में ठीक थी लेकिन सबके सामने बोलने से डरती थी। उसे लगता था कि लोग उसकी हंसी उड़ाएँगे। उसे करियट्ठी शब्द समाज… शीशे वाली लड़की (डर से आत्मविश्वास तक की यात्रा) : अवधेश कुमारRead more