जीवन का हर पल खेल है,
बुरा हो या अच्छा ।
जो हिम्मत से अडिग रहा,
वही खिलाड़ी है सच्चा ।
इसी पृष्ठभूमि में हम बात करते हैं राष्ट्रीय खेल दिवस की। राष्ट्रीय खेल दिवस मनाने की शुरुआत अधिकारिक रूप से 29 अगस्त 2012 महान हॉकी खिलाड़ी “मेजर ध्यानचंद “जी के जन्म दिवस पर हुई। इस दिवस की महता खेलों को बढ़ावा देना है। चाहे वह कोई भी खेल हो। ध्यानचंद जी जिन्होंने भारत को ओलम्पिक में “हॉकी खेल ” में तीन बार स्वर्ण पदक दिलाए। इस महान दिवस से खिलाड़ियों मे उत्साह और प्ररेणा का समावेश होता है।वर्तमान परिवेश में तो खेलों की बहुत महता है क्योंकि मशीनी युग के कारण शारीरिक श्रम बहुत कम हो गई। कृत्रिम दवाइयाँ और खाद के कारण खान-पान जहर होता जा रहा है। जिस कारण हम हर तरफ से बीमारियों से घिरे हैं चाहे फिर वे शारीरिक हो या मानसिक। ऐसी परिस्थिति में यदि खेल को जीवन में अपनाया जाए तो स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन का संगम जीवन को आनन्द की गंगा में गोता लगवाएगा।
इस दिन जगह जगह पर खेल प्रतियोगिताएँ करवाई जाती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, राज्य स्तर, जिला, ब्लाक, गाँव यहाँ तक कि गली, मोहल्ले में भी प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिलता है। नव ऊर्जा का संचार होता है। नव दिशा की और अग्रसर होते हैं। पारंगत खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर देश की शान बढ़ाने का सुनहरा मौका मिलने का मार्ग प्रशस्त होता है।
परन्तु ये भी कटु सत्य है कि खामियाँ हर जगह मिलती हैं। हम सहमत हैं इस तथ्य से परन्तु कमियों को दूर करना हमारा प्रथम कर्तव्य है। कमियाँ जैसे खेल आधार पर लड़के -लड़कियों में फर्क, महिला खिलाड़ियों का यौन शोषण, गरीबी के कारण श्रेष्ठ खिलाड़ी होते हुए भी टीम में भागीदारी न मिलना, अनुशासन की पालना न होना आदि। हमें इन सब व्यवस्थाओं पर जरूर काम करना होगा । तभी सच्चे अर्थों में खेल दिवस की महत्ता सारगर्भित होगी । उस महान खिलाड़ी के प्रति सच्चा सम्मान तभी होगा जब हम खेल को खेल की भावना से खेलें। मन से यही गूँज निकले –
खेलों से रहते खुश और स्वस्थ,
इनसे चले सुनियोजित जीवन रूपी रथ ।
दुष्टता का इनमें नहीं काम,
अनुशासन का सच्चा धाम
नेहा कुमारी
रा. स. हरावत राज उच्च माध्यमिक विद्यालय, गणपतगंज
सुपौल