“ना अब उ सब काम नहीं करेंगे…। बिल्कुल नहीं……..। एकदम कन्ट्रोल…।” दफ्तर के बड़ा बाबू रमेश वर्मा मन ही मन बुदबुदा रहे थे। हालांकि वो हर साल नव वर्ष पर खुद पे कंट्रोल का ब्रेक दबाते हैं मगर जनवरी में ही उसकी ब्रेक फेल हो जाती हैं। मगर इस बार वो डिस ब्रेक लगाना चाहते हैं।
उन्होंने इस बार पूरा मन बना लिया है। ना किसी का फाइल दाबुंगा , ना ऊपरी आमदनी का इच्छा रखुंगा, ना किसी को हिस्सा पहुंचाऊंगा । ना किसी को बार-बार आफिस दौड़ाऊंगा, ना किसी को फसाऊंगा ना किसी को निकालूंगा। अब सिर्फ सादा जीवन जीना है ,आखिर भगवान को भी तो मूंह दिखाना है ????।
वैसे तो बेचारे वर्मा जी ओल-झोल से दूर रहने वाले सामाजिक प्राणी थे । मगर क्या करें नौकरी में आते ही मकड़ जाल में फंस गए । बेचारे ऊपरी आमदनी वाली नौकरी में कबतक ऊपर से बचकर रहते । अपने हिस्सें के साथ सबके हिस्सें का ख्याल रखते-रखते वे कुछ ही दिन में ट्रेंड हो गये। फिर क्या था अपने बिरादरी के साथ ज़िन्दगी के गुलछरे उड़ाने लगे ।
वैसे वर्मा जी के नौकरी से उसके पिताजी काफी संतुष्ट थे । संतुष्टी से उत्पन्न खुशी भी बिल्कुल अलग दर्जे की थी । उन्हें मालूम था असली नौकरी तो ऊपरी आमदनी वाली होती है । बाकी सब तो नौकरीयां है……….। ब्याह -शादी, दान-दहेज हो या फिर सामाजिक इसटेटस, पुछ तो नौकरी की है नौकरीयां तो बस जीने का एकमात्र सहारा है , जो मरने नहीं देती ।
खैर जो हो … जो बीत गई सो बात गई । मगर इस बार वर्मा जी ने सोच लिया है जब आज रात के बारह बजे सोलहों सिंगार से सुसज्जित, नई नवेली 2026 उसके दरवाजे पर दस्तक देगी । तो वे नये संकल्प के साथ उनका हाथ पकड़ कर उसे अपने घर के अन्दर लाएंगे। और उसके सामने अपने कंठ के नली पर हाथ रखकर कहेंगे। आज से नो कमीशन डीयर।
मगर मुझे पता है बेवफ़ा की तरह नव वर्ष पर इसके संकल्प की ये ब्रेक पिछले जनवरी की तरह ही फेल हो जाएगी।
वैसे हम तो कहेंगे असली Happy New year तब होगा जब पिछले साल की भ्रष्टाचार, घुसखोरी, कालाबाजारी,जमाखोरी, अपहरण, बलात्कार,चोरी, घोटाले, महंगाई, दुर्घटना की जगह
महंगाई भत्ता, एरियर, वेतन वृद्धि, पेंशन ,रोजगार, शौध, अनाज का मूल्य व शिक्षण संस्थाओं में खुब बढ़ोतरी हो….…।
वर्ना अन्य New year की तरह 2026 भी रेनुअल न्यू ईयर ही कहलाएगी ।
अरविंद कुमार,
भरगामा अररिया