दस वर्षीय राहुल मेले से खरीदे गुल्लक में रोज सिक्के डालता था। कभी 1₹, कभी 2₹, कभी 5₹, कभी 10₹। मतलब जब जितना उसे मिल जाए उतने पैसे वह गुल्लक में डालता।
जब भी कोई पूछता गुल्लक के पैसे का क्या करोगे तो वह बड़ा ही खुश होकर बोलता ढेर सारे खिलौने।
एक दिन राहुल जब स्कूल से आया तो वह बहुत अनमना सा था, उसकी माँ ने कितनी बार पूछा वह क्यों उदास है तो वह टाल गया।
रात में जब घर वाले सभी सो गए तो उसने धीरे से अपने गुल्लक को तोड़ दिया और चुपचाप बैठ कर पैसे गिनने लगा। कुल 5058 ₹ गुल्लक में थे।
तभी राहुल की मम्मी की नींद खुल गयी, जब उन्होंने राहुल के टूटे गुल्लक को देखा तो उनका माथा ठनका। मगर फिर धैर्य धारण कर राहुल से गुल्लक तोड़ने की वजह पूछी तो पता चला कि उसके स्कूल के सामने एक छोटी सी दुकान है अगर दुकान वाले ने 5000₹ न दिए तो वह दूकान टूट जाएगी।
इसलिए राहुल दुकान वाले अंकल की मदद करना चाहता है। वह सुबह से रो रहे थे।
राहुल बोला मेरा गुल्लक उनके लिए खुशियां लाएगा।
तब राहुल की माँ को अपने बेटे पर बड़ा प्रेम आया और उसे गले लगाते हुए बोली हाँ बेटा, ये खुशियों का गुल्लक है।
रूचिका
प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार