शादी के तुरंत बाद बिटिया की बिदाई हो रही थी और वह माँ के गले लिपट कर जार-जार रोती जाती[...]
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असली कमाई-संजीव प्रियदर्शीअसली कमाई-संजीव प्रियदर्शी
चिलचिलाती धूप में ठेले पर ईख का रस बेचने वाले एक दिहाड़ी से मैंने पूछ लिया- ‘ दोपहर की इस[...]
तरकीब-संजीव प्रियदर्शीतरकीब-संजीव प्रियदर्शी
उस रोज मुझे रात की ट्रेन से घर लौटना था। चूंकि मैंने जाते समय ही यह सोच कर वापसी का[...]
जहर – संजीव प्रियदर्शीजहर – संजीव प्रियदर्शी
सुखाराम ने बजरंगी को अपने घर बुलवाकर कहा-‘ बजरंगी भाई, इस बार कपास की खेती कर लो,चाँदी काटोगे। और हां,[...]
नमक हराम -संजीव प्रियदर्शीनमक हराम -संजीव प्रियदर्शी
‘रमेश बिल्कुल नमक हराम निकला। कितना समझाया था कि बाबूजी को घर पर रखकर उनकी अच्छी तरह देखभाल किया करना।[...]
धरती रो पड़ेगी – संजीव प्रियदर्शीधरती रो पड़ेगी – संजीव प्रियदर्शी
रमिया और टुनका दहाड़ें मार कर रो रहे थे। रोते भी क्यों नहीं, जिगर का एक ही तो टुकड़ा था[...]
राखी का मोल-संजीव प्रियदर्शीराखी का मोल-संजीव प्रियदर्शी
राखी का मोल उस समय मेरी उम्र तेरह-चौदह वर्ष की थी। मैं अपनी भाभी के[...]
धूप में देवता-संजीव प्रियदर्शीधूप में देवता-संजीव प्रियदर्शी
धूप में देवता रघु बारह हजार रुपये पत्नी लखिया को देते हुए बोला – “रख[...]