बचपन में कोई सिखाता नहीं कि झूठ बोलना बुरा है, पर जब बोलते हैं और पकड़े जाते हैं – तभी[...]
Day: June 10, 2025
कछुआ: धैर्य, संतुलन और संरक्षण का प्रतीक : सुरेश कुमार गौरवकछुआ: धैर्य, संतुलन और संरक्षण का प्रतीक : सुरेश कुमार गौरव
प्रस्तावना: प्रकृति में ऐसे अनेक जीव हैं जो मौन रहते हुए भी हमें जीवन की महान शिक्षाएँ दे जाते हैं।[...]
राजा राममोहन राय : आधुनिक भारत के अग्रदूत : सुरेश कुमार गौरवराजा राममोहन राय : आधुनिक भारत के अग्रदूत : सुरेश कुमार गौरव
प्रस्तावना: भारत के नवजागरण की जब भी चर्चा होती है, राजा राममोहन राय का नाम सम्मानपूर्वक लिया जाता है। वे[...]
नाम और यश : गिरीन्द्र मोहन झानाम और यश : गिरीन्द्र मोहन झा
महापुरुष अज्ञात, निर्वाक और शांत होते हैं।महापुरुष नाम-यश के गुलाम नहीं होते हैं। वे शब्दों(निन्दा-स्तुति) के भी गुलाम नहीं होते[...]
वट सावित्री व्रत : गिरीन्द्र मोहन झावट सावित्री व्रत : गिरीन्द्र मोहन झा
महाभारत के वनपर्व में महामुनि मार्कण्डेय जब पाण्डवों से मिलते हैं तो पाण्डव उनसे बहुत सारे प्रश्न करते हैं, उनमें[...]
शिक्षा में मातृभाषा की उपयोगिता : अमरनाथ त्रिवेदीशिक्षा में मातृभाषा की उपयोगिता : अमरनाथ त्रिवेदी
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है । वह बंधनों से मुक्त होना नहीं चाहता । वह इससे जुड़कर ही अपनी कामयाबी[...]
आशा ही जीवन है : सुरेश कुमार गौरवआशा ही जीवन है : सुरेश कुमार गौरव
जीवन एक प्रवाह है—कभी शांत, कभी उग्र; कभी सरल, तो कभी दुर्गम। इस प्रवाह के मध्य यदि कोई तत्व हमें[...]
शिक्षा में बहुभाषावाद से सम्बन्धित लाभ और चुनौतियाँ : आशीष अम्बरशिक्षा में बहुभाषावाद से सम्बन्धित लाभ और चुनौतियाँ : आशीष अम्बर
बहुभाषावाद एक से अधिक भाषाओं को बोलने , समझने, पढ़ने और लिख सकने की क्षमता है । यह व्यक्तिगत या[...]
विषय में या विषय के प्रति रुचि व जिज्ञासा जगाना शिक्षक की कला : गिरीन्द्र मोहन झाविषय में या विषय के प्रति रुचि व जिज्ञासा जगाना शिक्षक की कला : गिरीन्द्र मोहन झा
शिक्षक के तीन ही प्रमुख गुण होते हैं।- विषय का गंभीर ज्ञान (content knowledge), सम्प्रेषण कौशल(communication skill) और शिक्षण-शास्त्र(Pedagogy)। कहते[...]
बचपन और उसकी यादें : रूचिकाबचपन और उसकी यादें : रूचिका
बचपन और उसकी यादें जब भी जेहन में आ जाती हैं तो होठों पर बरबस ही मुस्कान चली आती हैं।बचपन[...]