सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 ईस्वी को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगॉंव में हुआ था।इनके पिता का[...]
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पितृ दिवस विशेष : सं. गिरीन्द्र मोहन झापितृ दिवस विशेष : सं. गिरीन्द्र मोहन झा
आज पितृ दिवस पर हमारे ग्रंथों में पिता के लिए कहे गये शब्द:(संकलन: गिरीन्द्र मोहन झा) पा रक्षणे धातु से[...]
बाबा नागार्जुन की जयन्ती : हर्ष नारायण दासबाबा नागार्जुन की जयन्ती : हर्ष नारायण दास
नागार्जुन का जन्म1911 ईस्वी की ज्येष्ठ पूर्णिमा को वर्त्तमान मधुबनी जिले के सतलखा में हुआ था।यह सतलखा गाँव उनका ननिहाल[...]
कछुआ: धैर्य, संतुलन और संरक्षण का प्रतीक : सुरेश कुमार गौरवकछुआ: धैर्य, संतुलन और संरक्षण का प्रतीक : सुरेश कुमार गौरव
प्रस्तावना: प्रकृति में ऐसे अनेक जीव हैं जो मौन रहते हुए भी हमें जीवन की महान शिक्षाएँ दे जाते हैं।[...]
शिक्षा में मातृभाषा की उपयोगिता : अमरनाथ त्रिवेदीशिक्षा में मातृभाषा की उपयोगिता : अमरनाथ त्रिवेदी
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है । वह बंधनों से मुक्त होना नहीं चाहता । वह इससे जुड़कर ही अपनी कामयाबी[...]
आशा ही जीवन है : सुरेश कुमार गौरवआशा ही जीवन है : सुरेश कुमार गौरव
जीवन एक प्रवाह है—कभी शांत, कभी उग्र; कभी सरल, तो कभी दुर्गम। इस प्रवाह के मध्य यदि कोई तत्व हमें[...]
अकेलापन और एकांत- गिरीन्द्र मोहन झाअकेलापन और एकांत- गिरीन्द्र मोहन झा
अकेलापन बहिर्मुखी और एकांत अन्तर्मुखी होता है। धारावाहिक महाभारत में पितामह गंगापुत्र भीष्म का एक संवाद है, “धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में[...]