Sanjiv Priyadarshi

पुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शीपुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 8:24 pm

लघुकथा ”गांव में जो सबसे बढ़कर धर्मनिष्ठ होगा, आज की सभा में वे ही पुरस्कार के हकदार होंगे।” ग्राम-समिति की[...]

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Bimal Kumar

“समाज को बदल डालो – विमल कुमार ‘विनोद’“समाज को बदल डालो – विमल कुमार ‘विनोद’

0 Comments 9:30 pm

— एक रंगमंचीय नाटक ओपनिंग दृश्य- सुबह का समय मंदिर का दृश्य,बहुत सारे लोग मंदिर में हैं,घंटी बजती है,आरती शुरू[...]

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Sanjiv Priyadarshi

बोध – संजीव प्रियदर्शीबोध – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 8:39 pm

एक लघुकथा लकड़ा जेब से पिस्तौल निकालकर ज्यों ही गोलियाँ चलाता कि यकायक उसके हाथ रुक गये। यह क्या? ये[...]

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Mohammad Jahir

यार, तूने तो सब को रूला दिया – मो.जाहिद हुसैनयार, तूने तो सब को रूला दिया – मो.जाहिद हुसैन

0 Comments 6:50 pm

    वह दोस्ती ही क्या? जिसमें सब मीठा ही मीठा हो। दो दोस्त होंगे तो बीच-बीच में खींचातानी भी[...]

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Sanjiv Priyadarshi

परिवार – संजीव प्रियदर्शीपरिवार – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 6:21 pm

अपनी सहेली द्वारा ससुराल के बारे में पूछे जाने पर मनोरमा बोलने लगी -‘ अरे राधा, मैं ससुराल में भले[...]

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Sanjiv

दृष्टिकोण – संजीव प्रियदर्शीदृष्टिकोण – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 11:18 pm

लघुकथा सुनीता अपनी ननद की लड़की की शादी में काफ़ी लल्लो-चप्पो के बाद जाने को राजी हुई थी।ननद शोभा और[...]

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Devkant

कर्मों का फल – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’कर्मों का फल – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:59 pm

दीपू अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था। देखने में गोरा, लंबा और हृष्ट-पुष्ट था। उसने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त किया[...]

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Sanjiv

दूसरा भगवान – संजीव प्रियदर्शीदूसरा भगवान – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 7:43 pm

परामर्श शुल्क के अभाव में दो बार क्लीनिक से लौटाये जाने के बाद वह तीसरी दफे रुपये जुटाकर अपने दस[...]

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Sanjiv

वचनसीमा – संजीव प्रियदर्शीवचनसीमा – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 4:32 am

एक लघुकथा कपड़े के दो डिब्बे पति मनोहर को देती हुई बोली-‘ एक में तुम्हारी पसंद के शर्ट-पैंट हैं और[...]

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