गद्य गुँजन निबंध परम्परा और आधुनिकता एक-दूसरे के पूरक हैं : अमृता कुमारी

परम्परा और आधुनिकता एक-दूसरे के पूरक हैं : अमृता कुमारी



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प्रस्तावना

जो भी पुरानी बातें होती हैं, परम्परा वाली होती हैं। वास्तव में परम्परा एक गतिशील प्रक्रिया है, जो हम अपने पूर्वजों से प्राप्त कर अगली पीढ़ियों को स्थानांतरित करते हैं। सतही तौर पर परम्परा अभी तक के सभी विचारों का जमाव प्रतीत होती है, पर वास्तविकता यह है कि यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। हमने जो भी अपनी पिछली पीढ़ियों से अर्जित किया, वो अतीत की पूंजीभूत विचार नहीं है क्योंकि नये परिवेश के अनुसार कुछ पुरानी बातें छोड़ दी जाती हैं और कुछ नई बातें जोड़ दी जाती हैं। अतः परंपरा एक प्रकिया है जो अपने परिवेश के संग्रह को और त्याग को आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर क्रियाशील करता रहता है।

उदाहरण – पिंडदान एक भारतीय परम्परा है, जिसमें मृत पूर्वजों को अन्न अर्पित किया जाता है। यह हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक है और पूर्वजों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

आधुनिकता क्या है?

‘अधुना’ शब्द से आधुनिकता बनी है, अर्थात वर्तमान में जो कुछ है वह आधुनिक है। पर यह संकीर्ण परिभाषा है। आधुनिकता एक जटिल सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति है जो पारंपरिक मान्यताओं से अलग, एक व्यक्तिवादी और तार्किक दृष्टिकोण है। यह 19वीं सदी के अंत में उभरा और तेजी से बदलती दुनिया को स्वीकार करने का कार्य करता है।

 

परम्परा बनाम आधुनिकता:-

 

  1. सामाजिक स्तर पर

परम्पराएँ आदर्शों और सामूहिक पहचान से जुड़ी होती हैं, इसमें सामाजिक बंधन महत्वपूर्ण है, जबकि आधुनिकता व्यक्तिवादी सोच है।

  1. सांस्कृतिक स्तर पर परम्पराएँ सम्मानित अनुष्ठानों समारोहों,त्योहारों और कला के माध्यम से व्यक्त होती हैं, जबकि आधुनिकता समकालीन कला और साहित्य को प्रोत्साहित करके रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देता है। जो अक्सर मौजूदा मानकों को चुनौती प्रदान करते हैं।
  2. आर्थिक स्तर पर

परम्पराएँ कृषि और शिल्प पर आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं, जबकि आधुनिकता औद्योगीकरण और वैश्वीकरण को अपनाती है।

परम्परा पूरक आधुनिकता:-

अक्सर हम सोचते हैं कि परम्परा और आधुनिकता विरोधी हैं, लेकिन असल में परम्परा जड़ है तो आधुनिकता फूल है। जड़ के बिना फूल नहीं खिल सकता।परम्परा हमें पहचान देती है और आधुनिकता हमें गति देती है। परम्परा बताती है हम कौन हैं, आधुनिकता बताती है हमें कहाँ जाना है।

आज के भारत में इसका संगम:-

  1. धर्म और संचार में भावना वही पुरानी है, तरीका नया है। पहले मंदिर में लाइन लगती थी, आज ऑनलाइन दर्शन, पूजा-पाठ, आरती गायन और शादियाँ लाइव होती हैं।
  2. सामाजिक संरचना में परिवार का रूप बदला है – लिव इन रिलेशनशिप, एकल परिवार जैसे रूप आए हैं, पर परिवार के प्यार और सम्मान का संस्कार वही है।


  3. प्रौद्योगिकी में पुरानी चीजों पर आधुनिक मशीन का प्रयोग। जैसे हस्तशिल्प का इंटरनेट प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रचार।


  4. उत्पाद और वास्तुकला में मधुबनी पेंटिंग, खादी, भारतीय व्यंजन आज आधुनिक पैकिंग के साथ बिक रहे हैं। घरों में बाहर से काँच का मॉडर्न डिजाइन है और अंदर आँगन और तुलसी का पौधा है ये दोनों का मिश्रण है।


 

निष्कर्ष

परम्परा को आँख बंद करके मानना जड़ता है और आधुनिकता के नाम पर सब कुछ छोड़ देना दिखावा है। समझदार समाज वही है जो परम्परा की अच्छी बातों को सम्मान दे,सहिष्णुता को सर्वोपरि रखे और आधुनिकता की तार्किक बातों को अपना ले। इसलिए परम्परा विरोधी नहीं, बल्कि आधुनिकता की पहली सीढ़ी है।

 

अमृता कुमारी

विद्यालय अध्यापक

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