नशा सेवन : युवा फैशन : हर्ष नारायण दास

नशा सेवन को भारत के युवा एक फैशन से समझते हैं।नशा सेवन के रूप में मादक द्रव्यों के इस्तेमाल का इतिहास काफी पुराना है।धर्मान्ध लोग भांग और उससे बने पेय… नशा सेवन : युवा फैशन : हर्ष नारायण दासRead more

जयशंकर प्रसाद : हर्ष नारायण दास

महाकवि जयशंकर प्रसाद का जन्म काशी के एक सुप्रतिष्ठित वैश्य परिवार में ( माघ शुक्ल दशमी संवत1946)30 जनवरी 1889 ईस्वी को हुआ था।इनके पितामह शिवरत्न साहू एक विशेष प्रकार के… जयशंकर प्रसाद : हर्ष नारायण दासRead more

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के केन्द्रीय बिंदु और परिकल्पनाएँ : आशीष अम्बर

मानव जीवन में शिक्षा का महत्व इसी से पता चलता है कि मानव को जीवों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । मनुष्य अपने सोचने , सीखने तथा कल्पना करने की… राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के केन्द्रीय बिंदु और परिकल्पनाएँ : आशीष अम्बरRead more

पटना का गोलघर-एक ऐतिहासिक स्मारक : हर्ष नारायण दास

पटना विश्व के प्राचीनतम नगरों में से एक है।अपनी ऐतिहासिक गाथा के क्रम में इस नगर के नाम कई बार परिवर्तित हुए।कुसुमपुर, पुष्पपुर, अजीमाबाद, पाटलिपुत्र, पाटलिग्राम इत्यादि नामों से प्रसिद्ध… पटना का गोलघर-एक ऐतिहासिक स्मारक : हर्ष नारायण दासRead more

बंटी की दोस्ती- कंचन प्रभा

बंटी एक छोटा, चुलबुला खरगोश था जो जंगल के किनारे अपने बिल में रहता था। वह बहुत मिलनसार था, लेकिन उसके कोई खास दोस्त नहीं थे। वह हमेशा सोचता कि… बंटी की दोस्ती- कंचन प्रभाRead more

रजिया की शादी- नीतू रानी

रजिया की माँ रजिया की शादी बारह वर्ष में करवा देना चाहती थी। यानी कि “बाल विवाह”, क्योंकि अगर रजिया पंद्रह, सत्रह साल की हो जाएगी तो उसके लायक लड़का… रजिया की शादी- नीतू रानीRead more

तेते पाँव पसारिए : मनु कुमारी

मनुष्य को अपने सामर्थ्य के अनुसार हीं जीवन में खर्च करना चाहिए। ऐसा नहीं कि आमदनी अठन्नी हो और हम खर्चा रूपया करें। अपनी आमदनी के हिसाब से हीं अपना… तेते पाँव पसारिए : मनु कुमारीRead more

बचपन और उसकी यादें : रूचिका

बचपन और उसकी यादें जब भी जेहन में आ जाती हैं तो होठों पर बरबस ही मुस्कान चली आती हैं। बचपन के दिनों में गर्मी की छुट्टियों का वर्षभर बेसब्री… बचपन और उसकी यादें : रूचिकाRead more

सुनीता का त्याग : लवली कुमारी

खट-खट की आवाज सुन कर सुनीता ने कहा, “नैना देखो तो दरवाजा पर कोई आया है।”  “मां, पार्सल वाले भैया हैं”, सुनीता आश्चर्य से बोली।  “पार्सल वाले क्यों?” “पता नहीं… सुनीता का त्याग : लवली कुमारीRead more

हमारा व्यक्तित्व : राम किशोर पाठक

बात आज से 27 वर्ष पूर्व की है। उस समय मोबाइल का नामोनिशान नहीं था। कम्प्यूटर की शुरुआत हो चुकी थी। मैं पटना के एक निजी उच्च विद्यालय में अंग्रेजी… हमारा व्यक्तित्व : राम किशोर पाठकRead more