यह बुद्ध-महावीर की तपोभूमि है,
चाणक्य-अशोक की कर्मभूमि,
नालंदा का ज्ञान है इसमें,
लोकतंत्र का पहला पाठ है जहाँ,
हाँ… यह बिहार की धरती है,
जो सदियों से विश्व में विख्यात है।
बिहार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अत्यंत गौरवशाली रही है। यहाँ मौर्य और गुप्त जैसे शक्तिशाली साम्राज्यों का उदय हुआ। इसी माटी से भगवान बुद्ध और महावीर ने दुनिया को शांति का संदेश दिया, तो सम्राट अशोक ने ‘धम्म’ के माध्यम से सिद्ध किया कि एक शक्तिशाली शासक भी शांति मार्ग अपनाकर समस्त विश्व को प्रभावित कर सकता है। अविभाजित बंगाल का हिस्सा रहते हुए बिहार धन-धान्य और व्यापार का प्रमुख केंद्र था। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय वैश्विक ज्ञान के केंद्र थे, तो मध्यकाल में शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित ‘ग्रैंड ट्रंक रोड’ आज भी इंजीनियरिंग की मिसाल है। हालाँकि, औपनिवेशिक शोषण, विभाजन की विभीषिका और बाद के वर्षों में जातिगत व धार्मिक राजनीति के कारण बिहार आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ता गया।
बदलता परिदृश्य और नई संभावनाएँ
आज बिहार का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। कृषि प्रधान होने के बावजूद राज्य अब इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता के नए आयाम गढ़ रहा है। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, आर्यभट्ट और विद्यापति जैसे मनीषियों की यह धरती आज भी सर्वाधिक आईएएस-आईपीएस अधिकारी दे रही है। सांस्कृतिक क्षेत्र में मैथिली ठाकुर और खेल में वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा आज नई ऊर्जा के प्रतीक बन चुके हैं। वर्तमान में बिहार की आर्थिक विकास दर देश में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली दरों में से एक है। जैसा कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था— “भारत की प्रगति बिहार की प्रगति से जुड़ी हुई है।”
शिक्षा: विकास का आधार स्तंभ
2011 की जनगणना की तुलना में आज बिहार ने शिक्षा में अभूतपूर्व प्रगति की है। प्राथमिक शिक्षा में शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य लगभग प्राप्त कर लिया गया है। वर्ष 2006 में जहाँ 12% बच्चे विद्यालय से बाहर थे, आज यह आंकड़ा घटकर मात्र 4% रह गया है। इसका श्रेय सरकार की ‘साइकिल’ और ‘पोशाक’ जैसी लाभार्थी योजनाओं को जाता है, जिन्होंने विशेषकर बेटियों को हाई स्कूल तक पहुँचाया है। उच्च शिक्षा के लिए अलग विभाग का गठन, एआई (AI) आधारित पाठ्यक्रम और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएँ आधुनिक समय की माँग को पूरा कर रही हैं।
महिला सशक्तिकरण: आधी आबादी का उदय
बेटियों की पढ़ाई हेतु स्नातक उत्तीर्ण करने पर ₹50,000 तक की आर्थिक सहायता देना एक क्रांतिकारी कदम रहा है। पंचायतों में 50%, नौकरियों में 35% और इंजीनियरिंग कॉलेजों में 33% आरक्षण ने महिलाओं के सामाजिक स्तर को ऊँचा उठाया है। ‘जीविका’ दीदियों के माध्यम से लाखों महिलाएँ आत्मनिर्भर हुई हैं। आज बिहार पुलिस बल में देश की सर्वाधिक महिलाएँ कार्यरत हैं। हालाँकि, बाल-विवाह और मातृ मृत्यु दर (MMR) जैसी चुनौतियाँ अब भी मौजूद हैं, जिन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और जन-जागरूकता से ही समाप्त किया जा सकता है।
कृषि और औद्योगिकीकरण: नई राहें
बिहार की विशाल आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है। सरकार अब पारंपरिक खेती के स्थान पर जैविक खेती, एआई (AI) और आधुनिक यंत्रों को बढ़ावा दे रही है। मखाना, लीची और पटसन के उत्पादन में बिहार की वैश्विक पहचान है। ‘चौथे कृषि रोड मैप’ के तहत किसानों की आय दोगुनी करने हेतु खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) इकाइयों की स्थापना की जा रही है। बाढ़ और सूखे की समस्या के स्थाई समाधान हेतु ‘नदी जोड़ो परियोजना’ पर कार्य जारी है।
उद्योगों की बात करें तो पर्यटन क्षेत्र में बोधगया, राजगीर और वैशाली के साथ-साथ अब दरभंगा का ‘मिथिला हाट’ और सीतामढ़ी भी आकर्षण के केंद्र बन रहे हैं। सोनपुर में ‘हरिहरनाथ कॉरिडोर’ का निर्माण आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति देगा। आधारभूत संरचना के मामले में, पाँच नए एक्सप्रेस-वे और चार नए एयरपोर्ट्स का निर्माण बिहार की आर्थिक धमनियों को सशक्त करेगा।
चुनौतियाँ और संकल्प
प्रशासनिक पारदर्शिता और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के बावजूद, ‘पलायन’ और ‘बाढ़-सूखा’ जैसी समस्याएँ अब भी विकसित बिहार के संकल्प के मार्ग में बाधा हैं। बिहार देश का तीसरा सबसे बड़ी जनसंख्या वाला राज्य है; ऐसे में इतनी बड़ी ‘मानव संसाधन’ शक्ति को कुशल प्रशिक्षण (Skill Development) देकर ही हम बेरोजगारी की समस्या को दूर कर सकते हैं।
निष्कर्ष
यदि हम बिहार के गौरव को पुनः स्थापित करना चाहते हैं, तो संसाधनों के समुचित उपयोग और सही नीतिगत दिशा की आवश्यकता है। यह जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि हम सभी 13 करोड़ बिहारवासियों की है। हमें अपने अतीत के गौरव और भविष्य की संभावनाओं के बीच एक मजबूत सेतु बनना होगा। जब हर हाथ को काम और हर मस्तिष्क को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, तभी ‘उन्नत बिहार’ का स्वप्न साकार होगा।
लेखिका: अमृता कुमारी
पद: विद्यालय अध्यापक (11-12), लेखाशास्त्र
विद्यालय:- उच्च माध्यमिक विद्यालय बसंतपुर, सुपौल
0 Likes
