उसकी नींद खुली तो बिस्तर पर खून के धब्बे थे। पेट में मरोड़ उठ रही थी। बड़ी मुश्किल से कराते[...]
Month: May 2023
दूसरा भगवान – संजीव प्रियदर्शीदूसरा भगवान – संजीव प्रियदर्शी
परामर्श शुल्क के अभाव में दो बार क्लीनिक से लौटाये जाने के बाद वह तीसरी दफे रुपये जुटाकर अपने दस[...]
वचनसीमा – संजीव प्रियदर्शीवचनसीमा – संजीव प्रियदर्शी
एक लघुकथा कपड़े के दो डिब्बे पति मनोहर को देती हुई बोली-‘ एक में तुम्हारी पसंद के शर्ट-पैंट हैं और[...]
जनता – संजीव प्रियदर्शीजनता – संजीव प्रियदर्शी
एक बार किसी राजा के कुछ सभासदों ने उनसे पूछ लिया- ‘सच्चा देवदूत, जनता क्या होती है? आजतक हमलोग इसके[...]
पगला है- संजीव प्रियदर्शीपगला है- संजीव प्रियदर्शी
लघुकथा सनोज दास जिस दिन नौकरी में आये,उस दिन उनके हिस्से की ऊपरी कमाई ढ़ाई सौ रुपये बनती थी।साथी अहलकार[...]