Category: निबंध

स्वतंत्रता, स्वाधीनता और मुक्ति : गिरीन्द्र मोहन झास्वतंत्रता, स्वाधीनता और मुक्ति : गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 12:16 pm

स्वतंत्र रहना आपका अधिकार है । स्व का अर्थ अपना और तंत्र का अर्थ शासन और system होता है। अर्थात्[...]

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साइबर सुरक्षा और जागरुकता की आवश्यकता : आशीष अम्बरसाइबर सुरक्षा और जागरुकता की आवश्यकता : आशीष अम्बर

0 Comments 9:41 am

विषय वस्तु – आज इंटरनेट हमारे दैनिक जीवन के अभिन्न अंगों में से एक बन गया है । वह हमारे[...]

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वट सावित्री व्रत : गिरीन्द्र मोहन झावट सावित्री व्रत : गिरीन्द्र मोहन झा

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महाभारत के वनपर्व में महामुनि मार्कण्डेय जब पाण्डवों से मिलते हैं तो पाण्डव उनसे बहुत सारे प्रश्न करते हैं, उनमें[...]

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अंग्रेजी भाषा में शिक्षण की सार्थकता : डॉ स्नेहलता द्विवेदी आर्याअंग्रेजी भाषा में शिक्षण की सार्थकता : डॉ स्नेहलता द्विवेदी आर्या

0 Comments 9:27 am

अंग्रेजी भाषा की यात्रा एक सामान्य पिछड़े कबीले से शुरू होकर जहां के सभ्य सुसंस्कृत कहे जाने वाले लोगों से[...]

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कर्म और उसका फल : गिरीन्द्र मोहन झाकर्म और उसका फल : गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 8:57 pm

संस्कृत भाषा के कृ धातु में अच् प्रत्यय के योग से कर्म शब्द बना है। यत् क्रियते तत् कर्म अर्थात्[...]

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हिंदी में रोजगार की संभावनाएं- आशीष अम्बरहिंदी में रोजगार की संभावनाएं- आशीष अम्बर

0 Comments 2:09 pm

हिंदी हमारे देश की राजभाषा है। आज हिंदी भाषा के बढ़ते चलन और वैश्विक रूप ने रोजगार की अनेक संभावनाओं[...]

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अकेलापन और एकांत- गिरीन्द्र मोहन झाअकेलापन और एकांत- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 6:31 pm

अकेलापन बहिर्मुखी और एकांत अन्तर्मुखी होता है। धारावाहिक महाभारत में पितामह गंगापुत्र भीष्म का एक संवाद है, “धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में[...]

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प्रकृति – रणजीत कुशवाहाप्रकृति – रणजीत कुशवाहा

0 Comments 8:17 pm

हम सभी मानते है कि प्रकृति हमेशा न्याय करती है और यह मानना भी चाहिए।जो घटनाएं घटित होती है प्रकृति[...]

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vinod kumar Vimal

मूल्यों के विकास में परिवार की भूमिका- विमल कुमार विनोदमूल्यों के विकास में परिवार की भूमिका- विमल कुमार विनोद

0 Comments 8:10 pm

मूल्य शब्द का शाब्दिक अर्थ है-उपयोगिता या वांछनीयता।सामान्यतः किसी समाज में उन आदर्शों को महत्व दिया जाता है,जिनसे उस समाज[...]

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