आज हर दिन की भाँति ही मैं जब स्कूल पहुँची तो कुछ सूना सूना सा लगा। काजल जो कक्षा 3 की छात्रा थी, वह नहीं दिखी।
उसकी अनुपस्थिति को मैंने तुरन्त ही नोटिस इसलिए कर लिया था कि मेरे विद्यालय पहुँचते ही वह झट से मेरे पास आ जाती। मेरे मना करने के बावजूद मेरे पैर को छूकर प्रणाम करती और मेरे बैग को लेकर ऑफिस में रख कर आती थी।
हालांकि काजल के पैरों में पोलियो था मगर फिर भी वह शायद मेरे इंतजार में ही खड़ी रहती थी।
उसे बिल्कुल नही पसन्द था कोई दूसरा मेरे बैग को लेकर ऑफिस में रखें।
मगर आज काजल नही दिखी। थोड़ी देर बाद काम की व्यस्तता में काजल के विद्यालय में नहीं होने की बात मेरे दिमाग से उतर गयी।
उसके बाद प्रार्थना, फिर नामांकन अभियान के तहत घर -घर घूमने के लिए कुछ शिक्षकों के साथ निकल गयी।
रास्ते में बातों के दौरान उसी गाँव के शिक्षक ने कहा आज बहुत दुखद घटना हुई है, वह काजल नाम की लड़की जो कक्षा 3 में पढ़ती थी न उसका बड़ा ही भयंकर एक्सीडेंट हुआ है। उसके कमर की हड्डी टूट गयी है, डॉक्टरों ने कहा है कि आजीवन वह पैरों पर नही खड़ी हो सकती। ऐसा सुनकर मैं कुछ देर के लिए सदमे में आ गयी। बार बार उस बच्ची का चेहरा आँखों के सामने आ रहा था, उसकी मासूमियत, सरलता सब कुछ चलचित्र की भाँति नजरों के सामने से गुजर रहा था। फिर मैं साथी शिक्षकों के साथ उसके घर उससे मिलने गयी।
वह बिस्तर पर लेटी हुई थी, दवाईयों की बोतल उसको चढ़ाई जा रही थी।
जब उसकी माँ से मिली तो उनकी आँखें डबडबाई हुई थी, जिसे देख मेरी भी आँखें नम हो गईं।
घर में मातम पसरा हुआ था, कही भी रौनक नहीं दिख रही थी।
जब हम सभी काजल के कमरे में पहुँचे तो हमें देखे काजल का चेहरा खिल उठा।
वह उठ कर बैठने को हुई, पर हमने जबरदस्ती अपने चेहरे पर मुस्कान ला उसे लेटे रहने को कहा।
बातों बातों में वह छोटी बच्ची जिंदगी का सीख हमें दे गई।
उसने कहा, “मैं अपने पैरों पर नही खड़ी हो सकती तो क्या, देखिएगा मैडम मैं खूब पढूँगी और डॉक्टर बनूँगी।”
उसकी माँ ने उसे टोकते हुए कहा, “ये सब छोड़ो तुम आराम करो, फालतू बातें दिमाग मे न लाओ।”
अपने शरीर के साथ संघर्ष करने की जरूरत नहीं है।
तब उसने कहा, “अरे माँ तुम परेशान मत होओ।अभी तो मुझे स्कूल जाने के लिए ठीक होना है।”
बाकी तो बड़ी होकर डॉक्टर तो बनूँगी ही।
ये मैं कर सकती हूँ और करूंगी ही तुम देख लेना।
तब मुझे लगा वाकई जब इरादा दृढ़ हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।
एक दिन ये अपने पैरों पर भी अवश्य खड़ी होगी। और अपने सपनों को भी पूरा करेगी।
हमें उस दिन का इंतजार रहेगा।
रूचिका
प्रधान शिक्षिका
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार