गाँव-गंवई भाषा में समय की वास्तविकता पर आधारित लघुकथा।संक्षिप्त सार-जानवरों की चौपाल जिसमें कुत्ते,बिल्ली, कौआ,मैनागाय,बैल,भेड़-बकरी सारे चिंतित नजर आ रहे[...]
“कोई तो है”- श्री विमल कुमार”विनोद”“कोई तो है”- श्री विमल कुमार”विनोद”
रमेश नामक एक छोटा सा बालक बचपन में अपने दरवाजे पर प्रतिदिन सड़क के किनारे खेलता था।एक दिन इसी क्रम[...]
जिम्मेवारी- संजीव प्रियदर्शीजिम्मेवारी- संजीव प्रियदर्शी
शादी के तुरंत बाद बिटिया की बिदाई हो रही थी और वह माँ के गले लिपट कर जार-जार रोती जाती[...]
पछूवा कंपकपावे भूखवा दौड़ावे- श्री विमल कुमार”विनोद”पछूवा कंपकपावे भूखवा दौड़ावे- श्री विमल कुमार”विनोद”
गाँव-गंवई भाषा में लिखल लघुकथा।कैलू नामक एक साधारण व्यक्ति जो कि दैनिक मजदूरी करके अपना तथा अपने परिवार का भरण-पोषण[...]
माँ का साया- श्री विमल कुमार “विनोद”माँ का साया- श्री विमल कुमार “विनोद”
रबिया नामक एक साधारण परिवार की औरत जो कि बड़े अरमान के साथ अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को[...]
असली कमाई-संजीव प्रियदर्शीअसली कमाई-संजीव प्रियदर्शी
चिलचिलाती धूप में ठेले पर ईख का रस बेचने वाले एक दिहाड़ी से मैंने पूछ लिया- ‘ दोपहर की इस[...]
आदर्श-अमरनाथ त्रिवेदीआदर्श-अमरनाथ त्रिवेदी
कहते हैं समय की मार एक न एक दिन सब पर अवश्य पड़ती है; चाहे कोई कितना भी बलशाली और[...]
पागल कौन?” -श्री विमल कुमार”विनोद”पागल कौन?” -श्री विमल कुमार”विनोद”
श्री विमल कुमार”विनोद”लिखितनरेश नामक एक छोटा सा बालक जो कि बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि का था जिसका जन्म एक[...]
“चलो विद्यालय चलें”-श्री विमल कुमार“चलो विद्यालय चलें”-श्री विमल कुमार
ओपनिंग दृश्य गाँव का दृश्य-बहुत सारे बच्चे-बच्चियाँ खेल रहे हैं।कुछ बच्चे गाय-बकरी चराने जा रहे हैं।इसी समय कुछ बच्चे जिनके[...]
“आशियाना”-श्री विमल कुमार “विनोद”“आशियाना”-श्री विमल कुमार “विनोद”
मोनू नामक एक छोटा सा बालक जिसकी माता अपने पति के प्रताड़ना से त्रस्त होकर अपनी जीवन लीला को समाप्त[...]