भारतीय संस्कृति में जिज्ञासा का बड़ा ही सम्मान है। जिज्ञासा सफलता और उत्कर्ष का प्रथम सोपान है।
…… उपनिषद गुरु-शिष्य के संवाद से परिपूर्ण है। उपनिषदों में शिष्य ने गुरु से पूछा, “आप कौन हैं?” गुरु ने उत्तर दिया, “अहं ब्रह्मास्मि अर्थात् मैं ब्रह्म हूं।” शिष्य ने गुरु से पूछा, “मैं कौन हूं?” गुरु ने उत्तर दिया, “तत्त्वमसि(तत् त्वम् असि) अर्थात् तुम ही ब्रह्म हो ।” यमराज ने नचिकेता की जिज्ञासा को आदर देकर उन्हें आत्मज्ञानी बनाकर भेजा । अर्जुन की जिज्ञासा ने श्रीकृष्ण से गीता उपदेश प्राप्त हुआ, जिससे संसार लाभान्वित हुआ।
……न्यूटन की जिज्ञासा(सेब नीचे क्यों गिरा?) ने गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत और सूत्र दिया। वैज्ञानिकों की जिज्ञासा का परिणाम इतने अन्वेषण, अनुसंधान और आविष्कार हैं ।
……. विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने- किताबें पढ़कर प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करना चाहिए। विद्यार्थियों की जिज्ञासा का आदर होना चाहिए। कभी-कभी विद्यार्थियों के प्रश्नों से शिक्षकों को भी सीखने का मौका मिलता है।
……..सफलता और उत्कर्ष का मूल आधार है – जिज्ञासा(curiosity) और वैज्ञानिक दृष्टिकोण(scientific temperament).
…….गिरीन्द्र मोहन झा(स्वरचित)