Category: लघुकथा

अमावस की रात – स्नेहलता द्विवेदी “आर्या”अमावस की रात – स्नेहलता द्विवेदी “आर्या”

0 Comments 9:30 pm

लघु कथा अमावस की अँधेरी रात! मैं अकेली पगडंडियों से होती हुई गाँव की ओर जा रही थी। हाथ में[...]

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अमृता की पेंटिंग- अदिति भूषणअमृता की पेंटिंग- अदिति भूषण

0 Comments 11:45 pm

अमृता गाँव की सबसे होशियार और मेहनती लड़की थी। उसकी आँखों में हमेशा एक विशेष चमक रहती थी, जैसे वह[...]

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Sanjiv Priyadarshi

मैं ही देश हूँ – संजीव प्रियदर्शीमैं ही देश हूँ – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 9:29 pm

लघुकथा शहर कई दिनों से अशांत है। लोगों में नफ़रत और भय का माहौल है।कल तक जो लोग आपस में[...]

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Mukesh Kumar Mridul

स्वभाव – मुकेश कुमार मृदुलस्वभाव – मुकेश कुमार मृदुल

0 Comments 8:57 pm

लघुकथाअपने घर के बैठकखाने में टयूशन पढ रहे सात वर्ष का लडका पढने के क्रम में रुककर बोला – “अब[...]

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Sanjiv Priyadarshi

पुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शीपुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शी

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लघुकथा ”गांव में जो सबसे बढ़कर धर्मनिष्ठ होगा, आज की सभा में वे ही पुरस्कार के हकदार होंगे।” ग्राम-समिति की[...]

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Sanjiv Priyadarshi

बोध – संजीव प्रियदर्शीबोध – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 8:39 pm

एक लघुकथा लकड़ा जेब से पिस्तौल निकालकर ज्यों ही गोलियाँ चलाता कि यकायक उसके हाथ रुक गये। यह क्या? ये[...]

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Sanjiv Priyadarshi

परिवार – संजीव प्रियदर्शीपरिवार – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 6:21 pm

अपनी सहेली द्वारा ससुराल के बारे में पूछे जाने पर मनोरमा बोलने लगी -‘ अरे राधा, मैं ससुराल में भले[...]

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Sanjiv

दृष्टिकोण – संजीव प्रियदर्शीदृष्टिकोण – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 11:18 pm

लघुकथा सुनीता अपनी ननद की लड़की की शादी में काफ़ी लल्लो-चप्पो के बाद जाने को राजी हुई थी।ननद शोभा और[...]

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Devkant

कर्मों का फल – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’कर्मों का फल – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:59 pm

दीपू अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था। देखने में गोरा, लंबा और हृष्ट-पुष्ट था। उसने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त किया[...]

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