मुस्कान एक होनहार और शालीन बच्ची थी। तीसरी कक्षा से उत्तीर्ण होकर चौथी में नामांकन करवाया था। मुझे याद है उसकी माँ उसका नामांकन करवाने आईं थीं मुझे उसकी माँ राधिका इसलिए भी याद है कि उसने बड़े सलीके से अपनी बिटिया के बारे मे मुझसे पूछा था औऱ विनीत भाव से मुस्कान का ख्याल रखने के लिए आग्रह किया था। इस गांव में यह विशिष्ट घटना थी जिसने मुझे राधिका के उच्च कुल के होने का एहसास दिलाया था।
कुछ दिनों से मुस्कान के व्यवहार और हाव – भाव में मैं परिवर्तन देख रही।थीं। उसके चाल चलने में ठहराव था। पढ़ाई में उसका मन नही लग रहा था। वो मुझसे दूरी बनाने का प्रयास कर रही थी। मैं समझ गई कि कुछ तो असमान्य है। मैंने एक दिन वर्ग के उपरांत उसे अकेले में बुलाया एवं उसका मन टटोलने का प्रयास किया। “कैसी हो मुस्कान?” मैंने पूछा। “जी मैम ठीक हैं ” नज़र झुकाते हुए मुस्कान ने उत्तर दिया। उसके उत्तर देने का अंदाज बता रहा था कि वो सहज नही है। उसकी असहजता ने मुझे परेशान कर दिया। मैंने कहा ” तू चल मेरे साथ.. ” कहते हुए मैं उसे अध्यापक कक्ष की ओर ले आईं। उसे सहज करने के उद्देश्य से मैंनें पूछा ” आज-कल होमवर्क नही कर पाती हो, कुछ बात है क्या? तुम तो अच्छी बची हो..!” अपनी तारीफ सुन उसे अच्छा लगा और वो थोड़ी सहज हुई। “अभी मैम थोड़ा घर में।” अचानक रुक गई। “घर में क्या ” मैंने पूछा। ‘घर के काम में हाथ बटाना पड़ता है.. माँ कहती है कि अब यहीं काम आएगा। ” फिर वो चुप हो गई..लेकिन उसकी आंखें भर आईं। मैने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए संभाला.. “तुम रो क्यों रहीं हो.. मुझे बताओ मैं सब ठीक कर दूंगी एक दम चुप हो जाओ. पानी पी लो..” थोड़ी देर बाद मुस्कान सामान्य हुई। फिर उसने अपने घर की स्थिति बताई , तो मैं हैरान हो गई। राधिका उसकी माँ मुस्कान की शादी के लिए लड़का देख रहीं थीं उसके पिता ने अपने दूर के रिश्तेदार के लड़के से शादी की बात शुरू कर दी थी। लेकिन अभी बात प्रारम्भिक दौर में थी इस कारण मुस्कान विद्यालय आ रहीं थीं..
मैं किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई। कुछ पल के लिए स्तब्ध हो गई। मुझे विश्वास नही हो रहा था कि राधिका जिसे मैंने कुलीन समझा था वो अपनी नौ बर्ष की बेटी का ब्याह कर देगी।मुझे अपने अनुमान पर अफसोस हो रहा था। कुछ देर बाद जब मैं अकेली हुई तो मैंने मुस्कान के घर जाने का फैसला किया। उसके मुहल्ले की और मुस्कान की सहेली रजिया के साथ।
दूसरे दिन मैंने रजिया को बुलाया और मुस्कान के घर, माता-पिता, भाई – बहन आदि के बारे में भी। फिर मैंने रजिया को मुस्कान के घर चलने के लिए राजी किया।
मुस्कान विद्यालय नही आई । मुझे लगा कि मुझसे देर तो नही हो गई। फिर मैने मन को समझाया.. नहीं नहीं.. इतनी जल्दी कैसे कुछ हो सकता है.. मैंने प्रधानाध्यापक से संक्षिप्त बात की और अनुमति लेकर रजिया के साथ मुस्कान के घर पहुंच गई।
मुस्कान के घर का माहौल बोझिल उत्सव के जैसा दबा सहमा असहज.. राधिका ने दरवाजा खोला। मुझे देखकर अचम्भे में और किंकर्तव्यविमूढ़..!
मैंने पूछा कैसी हो राधिका । ? राधिका मुझसे अपना नाम सुनकर थोड़ी सहज और थोड़ी नर्वस.. अचानक मुझे देखकर! “जी ठीक हुँ ” उसने सिर हिला कर प्रत्युत्तर दिया। तभी मुस्कान के पिता शिव कुमार भी आ गए। समान्य शिष्टाचार के बाद मैंने पूछा ” मुस्कान कहाँ है?” जी मैडम वो तैयार हो रही है.. हमलोग आज शहर के मन्दिर जा रहे है.. मुस्कान का लगन होनेवाला है न.. शिव ने राधिका की बात काटते हुए कहा।
“कब?” मैंने पूछा ‘अभी दिन बार देखना क्षे। लड़का नौकरी में है मैडम.. मुस्कान क भाग बड़ निक क्षे..” शिव बिना रुके सबकुछ बोल गया। ” लड़के की उम्र क्या होगी ?” मैने पूछा। “अरे मैडम सरकारी नौकरी में है .. हम गरीब आदमी की औकात से बाहर है.. उमर में क्या रखा है? लड़की जल्दी सयानी हो जाती है..” वैसे मुस्कान की उम्र क्या है? नौ साल ही न.. तो इसके व्याह की जल्दी क्यों है? ” मैंने शिव की बात काटते हुए कहा। कुछ देर बात होती रहीं तो मैंने राधिका को साथ लिया और पूछा “क्या मुस्कान का शरीर और मन शादी के लिए तैयार हैं?” “नहीं मैडम ..” धीरे-धीरे बात बढ़ी लेकिन उस दिन कुछ निष्कर्ष नही निकला। फिर दूसरे दिन मैंने प्रधानाध्यापक और शिक्षा समिति के अध्यक्ष और उनकी बहु से बात की। अध्यक्ष की बहू संध्या मुझसे पूर्व परिचित और समझदार महिला थी। मुझे लगा कि सामाजिक स्तर पर दबाव के बाद ही मैं इसे रोक पाऊँगी.इस कारण मैंने घेराबंदी शुरू की और संध्या के माध्यम से बाल विवाह गैर कानूनी है यह विचार भी अध्यक्ष और अन्य के दिमाग में डाल दिया। मै जानती थी कि यदि मैं सीधे व्यवस्था और समाज से लड़ेंगी तो हार जाऊँगी इसलिए मैंने गणमान्य लोगों का साथ लिया।मैं, प्रधानाध्यापक, प्रियदर्शी जी, रुखसाना अध्यक्ष जी और मुखिया जी के संग हमलोग शिव कुमार को समझाने में सफ़ल हो गए और मुस्कान का जीवन बच गया। आज मुस्कान ने संघर्ष कर स्नातक पास कर स्टेट बैंक में प्रबंधक है और जब भी मिलती है उसके आँखों में आँसू भर जाते हैं और वो आह्लादित होकर गले लग जाती है और मैं भाव विभोर हो जाती हूँ।

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