एक हरिजन परिवार में पली-बढ़ी मनीषा।मनीषा का सपना था जो मैं बड़ी होकर पढ़ -लिखकर कुछ बनूँ । लेकिन उसके[...]
Category: लघुकथा
बंटी की दोस्ती- कंचन प्रभाबंटी की दोस्ती- कंचन प्रभा
बंटी एक छोटा, चुलबुला खरगोश था जो जंगल के किनारे अपने बिल में रहता था। वह बहुत मिलनसार था, लेकिन[...]
समान अवसर- रूचिकासमान अवसर- रूचिका
कक्षा से बच्चों के शोरगुल की आवाजें आ रही थी, प्रधानाध्यापक ने झांककर देखा तो कुछ बच्चे आपस में उलझ[...]
सत्य का प्रकाश- सुरेश कुमार गौरवसत्य का प्रकाश- सुरेश कुमार गौरव
गाँव के एक छोटे से विद्यालय में आदर्श नाम का एक शिक्षक था, जो अपने छात्रों को सिर्फ़ किताबों का[...]
छाँव की पंचायत- सुरेश कुमार गौरव छाँव की पंचायत- सुरेश कुमार गौरव
गर्मी की तपती दोपहर थी। खेतों के किनारे सात-आठ वृक्षों के झुंड छाया बिखेर रही थी। उनकी शाखाएँ ऐसे फैलीं[...]
ज्ञान की सच्ची पहचान- सुरेश कुमार गौरवज्ञान की सच्ची पहचान- सुरेश कुमार गौरव
गाँव के एक सरकारी विद्यालय में रमेश नाम के शिक्षक अन्य शिक्षकों की तरह वे भी पढ़ाते थे। उसकी सादगी,[...]
कृतघ्नता – अमरनाथ त्रिवेदीकृतघ्नता – अमरनाथ त्रिवेदी
बचपन में माता-पिता से किसे प्यार नहीं होता परन्तु जब बालक वयस्क बन जाता है और उसकी शादी हो जाती[...]
परोपकार का प्रतिफल – अमरनाथ त्रिवेदीपरोपकार का प्रतिफल – अमरनाथ त्रिवेदी
अमीर लोगों को लगता है कि मैं बड़ा हूँ। अधिक पढ़े लिखे लोगों को लगता है कि मैं किसी से[...]
विश्वास जीतने का प्रतिफल- अमरनाथ त्रिवेदी विश्वास जीतने का प्रतिफल- अमरनाथ त्रिवेदी
जब विश्वास की डोर एक दूसरे के साथ बँधती है तब एक दूसरे के साथ कार्य करने की नयी संस्कृति[...]
बदलाव -अमरनाथ त्रिवेदीबदलाव -अमरनाथ त्रिवेदी
अजीत और विक्रम दोनों एक ही मुहल्ले में रहते थे। अभी दोनों सरकारी विद्यालय में आठवीं कक्षा में पढ़ रहे[...]