गद्य गुँजन हिन्दी कहानी प्रतिभा को अवसर : रूचिका

प्रतिभा को अवसर : रूचिका


ruchika

मनोहर और श्याम जब मिलते खेल में लग जाते, उन्हें खेलने के लिए किसी विशेष खिलौनों की जरूरत नही पड़ती।जो भी सामान दिख जाए वही उनके लिए खिलौना बन जाता।
उन दोनों के घर वाले सदा ही उनके इस आदत से परेशान रहतें।
यूँही खेलते-खेलते एक दिन प्रखंड स्तरीय खेल प्रतियोगिता के अंतर्गत मनोहर लम्बी कूद और श्याम ऊँची कूद में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
इसी तरह आगे जिला स्तर पर चयन के बाद वह राज्य में पहुँचे।
उनके साथ उनके घर वाले भी राज्य में पहुँचे, वहाँ की शान ओ शौकत देखकर वे हतप्रभ हो रहे थे।
अब उन्हें महसूस हो रहा था कि बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार कार्य करने देना चाहिए।
आज के इस बदलते युग में सिर्फ पढ़ाई ही नही,हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के अवसर उपलब्ध हैं।
जरूरत है उसे मौका देने की।

रूचिका
राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

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