Category: संदेशपरक

Bimal Kumar

“होनहार बालक” – श्री विमल कुमार”विनोद”“होनहार बालक” – श्री विमल कुमार”विनोद”

0 Comments 8:23 pm

पृष्ठभूमि-मनोज एक दिन टहलते हुये गाँधी मैदान पटना पहुंचा।वहाँ उन्होंने एक बालक को एक “कागज का टुकड़ा” उठाकर पढ़ते देखा।बालक[...]

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Bimal Kumar

महाविनाश”-श्री विमल कुमार “विनोद”महाविनाश”-श्री विमल कुमार “विनोद”

0 Comments 8:42 pm

पृष्ठभूमि-(अचानक बादल फटने की आवाज की खबर)श्याम-(चिल्लाकर)भागो-भागो, जल्दी भागो,बाढ़,बाढ़,लोग पानी में बह गये,भागो-भागो।शंकर-(आश्चर्य से)क्या हुआ भाई,यह भागो-भागो,बाढ़-बाढ़ की आवाज कहाँ[...]

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Bimal Kumar

“पर्यावरण की तबाही”- श्री विमल कुमार “विनोद”“पर्यावरण की तबाही”- श्री विमल कुमार “विनोद”

0 Comments 8:38 pm

कास्टिंग सीन-बचाओ,बचाओ,अरे कोई तो बचाओ,बचने का कोई भी उपाय तो बताओ। चारों ओर तबाही ही तबाही नजर आ रही है।(नेपथ्य[...]

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Bimal Kumar

हाहाकार- श्री विमल कुमार”विनोद”हाहाकार- श्री विमल कुमार”विनोद”

0 Comments 7:58 pm

एक लघु नाटिका पृष्ठभूमि- गर्मी,गर्मी,शरीर गर्मीसे जल रहा है,जीवन जीना दूभर हो गया है,गर्मी की उमस ने तो जीना मुश्किल[...]

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Bimal Kumar

चरित्रहीन”-02 -श्री विमल कुमार”विनोद”चरित्रहीन”-02 -श्री विमल कुमार”विनोद”

0 Comments 8:58 pm

एक गाँव में सुशीला नामक एक 20 वर्षीय औरत जिसकी शादी रामू नामक एक साधारण आदमी से हुई थी।रामू एक[...]

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Bimal Kumar

परंपरागत संस्कृति की झलक- श्री विमल कुमार”विनोद”परंपरागत संस्कृति की झलक- श्री विमल कुमार”विनोद”

0 Comments 8:08 pm

ग्रामीण सामाजिक परंपरा एवं संस्कृति पर आधारित श्री विमल कुमार”विनोद” लिखित लघुकथा “परंपरागत संस्कृति की झलक”प्रस्तुत है।मोहन नामक एक शहर[...]

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vinod kumar Vimal

 दुःख में छिपा सुख- श्री विमल कुमार “विनोद” दुःख में छिपा सुख- श्री विमल कुमार “विनोद”

0 Comments 9:25 pm

आज से लगभग पचास वर्ष पूर्व की बात है,किसी गाँव में एक मध्यम वर्गीय परिवार था,जिसमें परिवार के मुखिया रेलवे[...]

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Kumkum

राजू को समझ आई -कुमकुम कुमारीराजू को समझ आई -कुमकुम कुमारी

0 Comments 9:06 pm

(राजू नहाते हुए) माँ-माँनल से पानी नहीं आ रहा है! माँ- क्यों?नल को ठीक से खोलो।राजू- माँ नल खुला हुआ[...]

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सचेतक स्वामी विवेकानंद जी-कुमारी निरुपमासचेतक स्वामी विवेकानंद जी-कुमारी निरुपमा

0 Comments 10:05 am

सचेतक स्वामी विवेकानंद जी        भारतीयता के ताने-बाने से बुना हुआ व्यक्तित्व, मातृभूमि के दुरावस्था से व्यथित हृदय[...]

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