राजू को समझ आई -कुमकुम कुमारी - गद्य गुँजन

राजू को समझ आई -कुमकुम कुमारी

Kumkum

(राजू नहाते हुए) माँ-माँ
नल से पानी नहीं आ रहा है!

माँ- क्यों?नल को ठीक से खोलो।
राजू- माँ नल खुला हुआ है।

माँ- अरे तो फिर पानी क्यों नहीं आ रहा है?
मैं तो सवेरे ही मोटर चलाकर टंकी भर ली थी।

माँ- राजू तुम कुछ देर पहले छत पर गए थे?
कहीं तुमने छत पर का नल खुला तो नहीं छोड़ दिया।
राजू- माँ……….

माँ- राजू तुम कब सुधरोगे बेटा?
मैं तुम्हें कितनी बार समझा चुकी हूँ।
यूँ पानी बर्बाद मत किया करो।
अब रहो आधे नहाए।
अभी तो चार घंटे तक बिजली नहीं आने वाली।
बिजली विभाग का संदेश है।

राजू- सॉरी माँ
मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।
अब मैं आगे से ऐसा नहीं करूँगा।
पानी का एक भी बूँद बर्बाद नहीं करूँगा।
मुझे माफ कर दो माँ।

        कुमकुम कुमारी "काव्याकृति"
                      शिक्षिका
      मध्य विद्यालय बाँक, जमालपुर
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