Sanjiv Priyadarshi

परिवार – संजीव प्रियदर्शीपरिवार – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 6:21 pm

अपनी सहेली द्वारा ससुराल के बारे में पूछे जाने पर मनोरमा बोलने लगी -‘ अरे राधा, मैं ससुराल में भले[...]

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Sanjiv

दृष्टिकोण – संजीव प्रियदर्शीदृष्टिकोण – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 11:18 pm

लघुकथा सुनीता अपनी ननद की लड़की की शादी में काफ़ी लल्लो-चप्पो के बाद जाने को राजी हुई थी।ननद शोभा और[...]

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Devkant

कर्मों का फल – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’कर्मों का फल – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:59 pm

दीपू अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था। देखने में गोरा, लंबा और हृष्ट-पुष्ट था। उसने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त किया[...]

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Sanjiv

दूसरा भगवान – संजीव प्रियदर्शीदूसरा भगवान – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 7:43 pm

परामर्श शुल्क के अभाव में दो बार क्लीनिक से लौटाये जाने के बाद वह तीसरी दफे रुपये जुटाकर अपने दस[...]

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Sanjiv

वचनसीमा – संजीव प्रियदर्शीवचनसीमा – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 4:32 am

एक लघुकथा कपड़े के दो डिब्बे पति मनोहर को देती हुई बोली-‘ एक में तुम्हारी पसंद के शर्ट-पैंट हैं और[...]

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Sanjiv

पगला है- संजीव प्रियदर्शीपगला है- संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 10:55 am

लघुकथा सनोज दास जिस दिन नौकरी में आये,उस दिन उनके हिस्से की ऊपरी कमाई ढ़ाई सौ रुपये बनती थी।साथी अहलकार[...]

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