कर्म और विचार- गिरीन्द्र मोहन झाकर्म और विचार- गिरीन्द्र मोहन झा

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कहना कठिन है, कर्म पहले आया अथवा विचार? रामायण के किष्किन्धाकाण्ड में केवल विचार है, तो परिणाम कुछ नहीं, लंकाकाण्ड[...]

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शुभस्य शीघ्रं अशुभस्य कालहरणम् -गिरीन्द्र मोहन झाशुभस्य शीघ्रं अशुभस्य कालहरणम् -गिरीन्द्र मोहन झा

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रावण के द्वारा दी गयी शिक्षा शुभस्य शीघ्रं अशुभस्य कालहरणम्(शुभ कार्य जब मन में आए तो उसे शीघ्र कर लो,[...]

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योग बिना जीवन बेकार-शशिकान्त वर्मायोग बिना जीवन बेकार-शशिकान्त वर्मा

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योग बिना जीवन बेकार युग-युग की यही पुकार, योग बिना जीवन बेकार। जो नहीं योग करता, दिन-प्रतिदिन रोग गढ़ता। मोटापा,[...]

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रौशन वर्मा

“योग “मनुष्य मात्र का जीवन लक्ष्य – रौशन वर्मा“योग “मनुष्य मात्र का जीवन लक्ष्य – रौशन वर्मा

0 Comments 11:56 pm

जन ‐जन के मन में , प्रज्जवलित हो दीप योग का । रहे रोग -मुक्त मानव-समाज और कल्याण हो विश्व[...]

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Sanjiv Priyadarshi

मैं ही देश हूँ – संजीव प्रियदर्शीमैं ही देश हूँ – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 9:29 pm

लघुकथा शहर कई दिनों से अशांत है। लोगों में नफ़रत और भय का माहौल है।कल तक जो लोग आपस में[...]

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Mukesh Kumar Mridul

स्वभाव – मुकेश कुमार मृदुलस्वभाव – मुकेश कुमार मृदुल

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लघुकथाअपने घर के बैठकखाने में टयूशन पढ रहे सात वर्ष का लडका पढने के क्रम में रुककर बोला – “अब[...]

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Manish

समर्पण से शक्ति तक, पांच साल बेमिसाल – डॉ मनीष कुमारसमर्पण से शक्ति तक, पांच साल बेमिसाल – डॉ मनीष कुमार

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#पांच साल बेमिसाल बिहार के शिक्षा विभाग में शिक्षकों ने स्वप्रेरणा से एक ऐसी गतिविधि से जुड़ते गए जहां से[...]

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Sanjiv Priyadarshi

पुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शीपुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शी

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लघुकथा ”गांव में जो सबसे बढ़कर धर्मनिष्ठ होगा, आज की सभा में वे ही पुरस्कार के हकदार होंगे।” ग्राम-समिति की[...]

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