गणवेश; यह वह आवरण है जो हमारी कई पृष्टभूमि को ओझल कर देती है। यह हमारी ज्ञान रूपी गाड़ी को[...]
अपना-पराया- संजीव प्रियदर्शीअपना-पराया- संजीव प्रियदर्शी
लघुकथा आज देर शाम रघुनाथ जब घर लौटा तो पत्नी राधिका को डरी-सहमी मकान के सामने बरसाती में पाया। कारण[...]
फर्ज- संजीव प्रियदर्शीफर्ज- संजीव प्रियदर्शी
एक लघुकथा चोर-चोर का शोर सुनते ही अपनी जान पर खेलकर भाग रहे लड़के के पीछे लोग दौड़ने लगे थे।[...]
लक्ष्य बिना जीवन बेकार-श्री विमल कुमार “विनोद”लक्ष्य बिना जीवन बेकार-श्री विमल कुमार “विनोद”
प्रत्येक जीव के जीवन जीने का अपना लक्ष्य होता है ,जिस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वह प्रयास करता है[...]
सहपाठी का हृदय परिवर्तन (संस्मरण)
सुरेश कुमार गौरवसहपाठी का हृदय परिवर्तन (संस्मरण)
सुरेश कुमार गौरव
बात उस समय की है जब मैं दस वर्ष का था। और 1978 का साल था। तब मैं पंचम वर्ग[...]
इनकलाब- संजीव प्रियदर्शीइनकलाब- संजीव प्रियदर्शी
ब्रिटिश हुकूमत का काल था।उस समय भारतीय समाज अनेक कुप्रथाओं से दूषित पड़ा था, जिसमें नरबलि का प्रचालन भी जोरों[...]
वृक्ष लगाओ,रोजगार पाओ- श्री विमल कुमार “विनोद”वृक्ष लगाओ,रोजगार पाओ- श्री विमल कुमार “विनोद”
रामू,श्याम,मोहन,रघू,शशि,सोहन नामक बेरोजगार दोस्त जीवन में बेरोजगारी की मार से जूझते हुये तबाही के चरम शिखर पर पहुँच गये हैं।अब[...]
“उपहार में वृक्ष”- श्री विमल कुमार “विनोद”“उपहार में वृक्ष”- श्री विमल कुमार “विनोद”
मोहन एक विवाह समारोह में गया है।विवाह के समय जब वरमाला का कार्यक्रम चल रहा है वहाँ पर कई बड़े-बड़े[...]
वृक्ष धन अर्जन का एक साधन- श्री विमल कुमार”विनोद”वृक्ष धन अर्जन का एक साधन- श्री विमल कुमार”विनोद”
(राष्ट्रीय बालिका दिवस पर श्री विमल कुमार”विनोद” की प्रस्तुति।)23 वर्षीय मोहन एक सीधा- साधा खूबसूरत लड़का जो कि कर्मठ लेकिन[...]
कालचक्र- श्री विमल कुमार विनोदकालचक्र- श्री विमल कुमार विनोद
।मोहन बाबू जो कि एक दफ्तर में काम करते थे।कामकाज करते-करते इनको यह महसूस होने लगता है कि अब जीवन[...]