सफलता का रहस्य-जैनेन्द्र प्रसाद रवि - गद्य गुँजन

सफलता का रहस्य-जैनेन्द्र प्रसाद रवि

सफलता का रहस्य

          एक छोटा बच्चा जो बहुत ही जिज्ञासु और होनहार था एक दिन अपने पिता से पूछा-पिताजी सफलता का रहस्य क्या है? उसके पिता ने उस बच्चे को एक संत के पास भेजा और कहा, वे ही तुम्हारे प्रश्र का सही उत्तर दे सकते हैं। अगले दिन वह लड़का अपने प्रश्र का सही उत्तर पाने चल दिया। संत के पास पहुँचकर बच्चे ने देखा कि वह बहुत व्यस्त हैं और अनेकों लोग उनसे मिलने को कतारबद्ध खड़े हुए हैं। संत पुरुष सभी से मिलकर बातें कर रहे हैं। अपनी बारी आने पर बच्चे ने उनसे अपनी जिज्ञासा प्रगट की। संत ने पूछते हीं कहा- इतनी कम उम्र में इतना बड़ा सवाल? अवश्य तुम अपने जीवन में बहुत आगे बढ़ोगे। संत ने उस बच्चे को पानी भरा एक ग्लास देकर कहा मेरे आश्रम में लगे पेड़-पौधों एवं यहाँ की हरियाली का एक बार आनंद लेकर आओ फिर मैं तुम्हारे प्रश्र का जवाब दूँगा! लेकिन हाँ ध्यान रहे एक बूंद भी पानी गिरना नहीं चाहिए।
आधे घंटे बाद बच्चा संत के पास वापस आया। संत ने बच्चे से आश्रम में लगे पेड़-पौधों एवं वहाँ रहने वाले जीव-जंतुओं के बारे में प्रश्र करने पर बच्चे ने कहा- बाबा! मैंने तो यहा कुछ देखा हीं नहीं, मेरा तो पूरा ध्यान इस गिलास मरे पानी पर था जिसे सावधानी पूर्वक थामें जा रहा था।

संत ने कहा- यही सफलता का रहस्य है। तुम जीवन में कितना ही उन्नति कर लो परन्तु अपने जड़ एवं उद्देश्य को कभी मत भूलना। बेशक हम दुनियाँ में बहुत कुछ हासिल करते हैं परन्तु अपने आधार, जड़ को भूल जाते हैं। जो अपनी पहचान बनाये रखता है वही सबसे सफल और कामयाब व्यक्ति कहलाता है।

जैनेन्द्र प्रसाद रवि
म. वि. बख्तियारपुर पटना

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One thought on “सफलता का रहस्य-जैनेन्द्र प्रसाद रवि

  1. बहुत अच्छा, प्रेरणा दायक प्रसंग । बहुत बहुत धन्यवाद सर ।

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