गद्य गुँजन संस्मरण ज़िंदगी में लोग : रिंजू कुमारी

ज़िंदगी में लोग : रिंजू कुमारी



ज़िंदगी में लोग भी कितने अजीब होते हैं… पहले कहते हैं—“हम हैं न, तुम्हारे साथ।” कुछ वक़्त तक हाथ थामते हैं, आपकी ख़ामोशियों को समझने का दावा करते हैं, आपके दर्द में अपना हिस्सा होने की बात करते हैं… और फिर एक दिन, बिना कुछ कहे आपकी जगह किसी और को दे देते हैं।

शिकायत भी करें तो किससे करें? आख़िर रिश्तों की भी अपनी एक उम्र होती है, और कुछ लोग सिर्फ़ उतनी ही देर तक हमारे होते हैं, जितनी देर तक उन्हें हमारी ज़रूरत होती है।
फिर किसी से नाराज़ क्यों होना… अकेले आए थे, कुछ रिश्ते रास्ते में मिले, कुछ बीच राह छूट गए, और आख़िर अपनी मंज़िल तक चलना तो अकेले ही है।

बस कभी-कभी… कोई छोटी-सी बात दिल में बहुत गहराई तक उतर जाती है। शायद इसलिए नहीं कि बात बड़ी थी, बल्कि इसलिए कि कहने वाला अपना था।

इंसानियत ओढ़ लेना आसान है, मीठे शब्द बोल लेना भी आसान है, किसी के सामने संवेदनशील होने का अभिनय करना भी आसान है… मगर किसी के टूटने पर उसके पास ठहर जाना, उसकी ख़ामोशी को सुन लेना, बिना किसी स्वार्थ के उसका हाथ थामे रखना— हर किसी के बस की बात नहीं।

इसलिए अब किसी से कोई शिकायत नहीं… बस इतना समझ लिया है कि हर मुस्कुराता चेहरा अपना नहीं होता, हर “मैं तुम्हारे साथ हूँ” हमेशा नहीं रहता, और हर रिश्ता आख़िरी पड़ाव तक साथ चले— ज़रूरी नहीं।

कुछ लोग सबक बनकर आते हैं, कुछ याद बनकर रह जाते हैं, और कुछ… दिल में एक ख़ामोश-सा दर्द छोड़कर चले जाते हैं।
फिर भी दिल को पत्थर मत बनाइए… क्योंकि दुनिया चाहे कितनी भी बदल जाए, इंसानियत का बचा रहना ही हमारे इंसान होने की सबसे खूबसूरत वजह है।

नोट:- आप सभी लोग अपना अपना सुझाव जरूर दीजियेगा l
धन्यवाद

Rinju kumari
Head teacher
P s paswan tola kirkichiya Forbesganj araria bihar

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