बैगलेस शनिवार -मीरा सिंह "मीरा" - गद्य गुँजन

बैगलेस शनिवार -मीरा सिंह “मीरा”

Meera Singh

आठ वर्षीय रामू अहले सुबह बिना किसी की आवाज लगाए स्वत: उठा ही नहीं बल्कि अपने स्कूल के जूते भी साफ करने लगा।यह देख उसकी मां को बहुत हैरानी हुई।वो मुस्कुराते हुए पूछ बैठी “क्या बात है? मेरा राजा बेटा तो आज अपने आप जाग गया? तबियत तो ठीक है न बाबू?”कहते हुए मां बहुत स्नेह से उसके माथे को छूकर देखी।वह बिना कुछ बोले जूते साफ़ करने में व्यस्त रहा। मां की जिज्ञासा शांत नहीं हुई।वह पुनः बोल पड़ी “आज तो तेरा जन्मदिन भी नहीं है? क्या बात है? स्कूल में सर कुछ समझाएं हैं क्या?या कहीं घूमने फिरने की तो प्लानिंग नहीं है न?अपने आप इतना जल्दी कैसे उठ गया?” मां ने प्रश्नों की बौछार से वह आंख मिंचते हुए बोला “मां ,सर बोले है न –कि स्कूल रोज़ समय पर आना चाहिए।” उसके मुंह से यह बात सुन मां की आंखें आश्चर्य से फ़ैल गई।मन ही मन सर को धन्यवाद दी जिनके कारण विद्यालय जाने में आनाकानी करने वाला बेटा स्वत: तो जागा ही, विद्यालय जाने में रूचि भी दिखा रहा है।वो सब्जी छौंकने जा ही रही थी, तभी बड़ा बेटा मोहन जो इंटर में अध्ययनरत था, अपने कमरे से बाहर आया और मुस्कुराते हुए मां को उसका सुबह उठने की असली वजह समझाने लगा “मम्मी,पता है–आज रात में कई बार उठा है। स्कूल जाने के लिए कल से ही बावला हो रहा है।”
” खुश है?? मगर क्यों? आखिर आज वैसा क्या है स्कूल में?” मां आश्चर्य से पूछी।तब बड़े बेटे ने बिहार के स्कूलों में शुरू हुए “बैगलेस शनिवार कार्यक्रम” के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि किस तरह बच्चे बिना बैग के विद्यालय जाएंगे और खेल खेल में पढ़ाई के साथ नाटक, कहानी, कविता, ड्राइंग,खेल कूद और बहुत कुछ सीखेंगे। यूं समझ लो— खूब मस्ती करेंगे सब। अब समझी आप? क्यों जल्दी उठा?” “बेटा,कारण जो भी हो पर परिणाम बहुत सकारात्मक है। स्कूल ना जाने वाले बच्चे स्वत: स्कूल जाएं, इससे अच्छा और क्या हो सकता है? मैं तो सरकार की इस पहल के लिए दिल से धन्यवाद देती हूं”। कहते हुए राजू की मां प्रसन्नचित किचन की ओर नाश्ता तैयार करने चल पड़ी।

मीरा सिंह “मीरा”
+२, महारानी उषारानी बालिका उच्च विद्यालय डुमराँव, जिला-बक्सर, बिहार

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