मंजर-श्री विमल कुमार - गद्य गुँजन

मंजर-श्री विमल कुमार

Bimal Kumar

मंजर” में आम के मंजर से वसंत ॠतु के आवे के संकेत मिलऽ हे।कोयल के कूक के जेकरा वर्णन बहुत गीत मे भी कइल गेल हथऽ जेकरा में कि”कोयल जइसन कूक के वर्णन कइल गेल हे”जे कि ओकर लक्षण हे।जब कोइली बोलइत हे तब आम मंजरा हे,आऊ जब आम मंजरा हे तो कोइल बोलऽ हे।एकरा से एगो बात के पता चल जा हे कि आम के मंजर आउ कोइल के मीठ आवाज दुन्नों में पता न केतना नजदीकी ताल्लुकात हे।जाड़ा आउ गरमी के बीच के सोहावन मौसम अमदी से जानवर तक केकरा न आनन्द देवे।इहे खातिर इ आलेख के लेखक के रतिया में सुते से पहिले आउ भोरे भोरे आम के मंजर के सुगंध लेबे के मन हो जा हे।
अइसे तो सब कली-मंजर कहा सकऽ हे,बाकी आम के मंजर के
बात कुछ और हे।एही लागी मंजर आम के फूल के ही मानल जा हे।
भगवान कामदेव अपन फल
के बाण से सबके घायल करऽ हथ, आउ सउंसे संसार पर उनकर विजय धजा फहरा हे।उनकर वाण में पाँच तरह के फूल मानल जा हे,एकरा में एगो महत्वपूर्ण वाण आम के मंजर के भी हे,जे वसंत ऋतु में दिखाई पड़ हे आउ सबके मन में सत्तल अनुराग भी जगा दे हे।ई मंजर प्रकृति के द्वारा देल गेल अइसन तोहफा हे जे काफी लोग के उत्तेजक,प्रेमी लोग के उत्प्रेरक तथा साहित्यिक,विशेष रूप से लेखक लोग के अपन तरफ आकर्षित करे वाला हे।
आम के मंजर से भरला पर लग हइ कि बगिया में जवानी फूट
पड़इल हे।हर जगह जोस खरोस, एक नशा अइसन परतीत होवऽ हइ।अदमी अपन जीवन में कोमल कोमल कल्पना में आकाशीय उड़ान भरऽ हइ।बगिया भी मांजर से भर के ओइसे ही उन्मादल जइसन लगऽ
हइ।जवानी में आँसू मुस्कान के सौदा होवऽ हे,प्रेम भरल आँसू आउ अल्हड़ मुस्कान।आम के मंजर बगिया में जवानी भर दे हइ।देखताहर में भी जवानी उमड़
आव हइ-बड़ा भावुक बड़ा हरकती।एही वास्ते
कंदअर्प देवता यानि कामदेव भी तीनो लोक के वश में करे लागी जउन वाण के उपयोग कर हथिन
उ फूल के हइ।
प्रकृति में अइसन कहल जा हे कि
जइसे अशोक मुग्धानारी के लात खा के खिल जाहे।कनइल के पेड़ तर जब कोई सुन्दर अउरत चल जा हे तो ओकर फूल खिल उठऽ हे।कुरवक कामिनी(सुन्दर जुआन
अउरत)के आलिंगन पाके फुला उठऽ हे।चमपा रमनी के रस भरल
हँसी मुस्कान से खिल जाहे।तिलक कामिनी के तिरछा चितवन से घायल होके फूल से लमर जा हे।नमेरू सुन्दरी के गान
सुनके खिलऽ हे।प्रियंगु तिरिया से छुआ के खिलऽ हे।मंजर कोई मेहरारू के मीठ-मीठ बोली सुनके खिल जा हे।बकुल इया मौलसिरी आउ आम कामिनी के मुँह के सुवासे से खिल उठऽ हे।
आम के मंजर अत्यंत सुन्दर लगऽ हे।हर कोई क्षण भर रूक के आम के मंजर के देखेला विवश हो जा हे।ओकर रंग,ओकर रूप आउ सुगंध हर अदमी के अपना तरफ खींच ले हे।
मंजर के देख के लग हे जइसन कि लेखक के अपन दुलहिन के तरह सुन्दर,पटरानी जइसन झूमऽ हे।गौरव में गरूर में।ऊ मंजर हँसइत भी हे,लजाइत भी हे, मोहइत भी हे,बेधइत भी हे।कुल मिलाके मंजर के शास्त्र में कामदेव के एगो महत्वपूर्ण वाण भी मानल जा हे,बरबस अपन सुन्दरता आउ सुगंध से सबके मन मोह ले हे।इहे खातिर एगो गाना में कहल गेल हथ कि जइसे आमवा के मंजूरा से रस चुवेला के साथ सुन्नर,सुघड़,आनंदायी मगही पढ़े के अलग आनंद मिलल हे।


आलेख साभार-श्री विमल कुमार
“विनोद”प्रभारी प्रधानाध्यापक राज्य संपोषित उच्च विद्यालय पंजवारा,(बाँका)।

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