लघुकथा- सुधीर कुमार - गद्य गुँजन

लघुकथा- सुधीर कुमार

Sudhir

” आइए हरेंद्र चाचा , बैठिए । कहिए , कैसे आना हुआ ? ” घर से बाहर आते हुए मुखिया जी ने अपने पड़ोसी हरेंद्र ठाकुर को देखते हुए कहा । बरामदे पर पड़ी हुई कुर्सी पर बैठते हुए हरेंद्र ठाकुर बोले , ” बेटा , राशन कार्ड बनबाना है । सारी कागजात लाया हूँ । देख लो और जरा फार्म पर दस्तखत कर दो । ” मुखिया जी सभी कागज देखने लगे । हरेंद्र ठाकुर ने आगे कहा , ” बेटा , मैं कुछ खर्चा वर्चा नहीं दे पाऊँगा । तुम तो जानते ही हो कि मेरे दोनों बेटे बाहर रहते हैं । घर का खर्च भी मुश्किल से चलता है । ” ” नहीं चाचा । ऐसी कोई बात नहीं है । मैं दस्तखत कर देता हूँ । ” कहते हुए मुखिया जी ने फार्म पर दस्तखत कर दिया । हरेंद्र ठाकुर फार्म लेकर चले गए । मुखिया जी ने तुरंत प्रखंड कार्यालय के किरानी शर्मा जी को फोन धराया और कहा , ” शर्मा जी , मेरे बगल का एक आदमी हरेंद्र ठाकुर राशन कार्ड बनबाने जा रहा है । उससे कम से कम पाँच हजार लीजिएगा । साले ने चुनाव के समय वोट देने के बदले दो हजार लिया था । ”

सुधीर कुमार , मध्य विद्यालय शीशागाछी प्रखंड टेढ़ागाछ जिला किशनगंज बिहार किशनगंज , बिहार

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