विश्व माहवारी दिवस-प्रियंका प्रिया - गद्य गुँजन

विश्व माहवारी दिवस-प्रियंका प्रिया

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विश्व माहवारी दिवस
माहवारी को मासिक धर्म, पीरियड्स,रजोधर्म, मेन्स्ट्रूएशन जैसे नामों से जाना जाता है। महिलाओं को माहवारी के दौरान स्वच्छता बरतने को लेकर जागरूक करने हेतु हर साल दुनिया भर में २८ मई को मेन्स्ट्रूअल हाइजीन डे मनाया जाता है। इसकी शुरुआत साल २०१४ में जर्मन एनजीओ वाॅश यूनाइटेड ने की थी। इसको मनाने का उद्देश्य महिलाओं को माहवारी स्वच्छता और सुरक्षा हेतु जागरुक करना है। इस बार की माहवारी दिवस का थीम It’s time for Action रखी गई है। इसका अर्थ अब पीरियड्स को लेकर सोचने का नहीं बल्कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता को लेकर सतर्क रहने का है। इस दिवस के जरिए हम यौन शिक्षा, लैंगिक समानता और माहवारी स्वच्छता प्रबंधन जैसे मुद्दों पर लोगों को जागरूक कर सकते हैं।
आइए समझते हैं माहवारी क्या है। जब कोई लड़की किशोरावस्था में पहुंचती है तब उसके अंडाशय इस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन नामक हार्मोन उत्पन्न करने लगते हैं। इन हार्मोन की वजह से हर महीने गर्भाशय की परत मोटी होने लगती है। कुछ अन्य हार्मोन अंडाशय को एक अनिषेचित डिम्ब उत्पन्न एवं उत्सर्जित करने का संकेत देते हैं। सामान्यतः लड़की माहवारी के आसपास यौन संबंध नहीं बनाती हैं तो गर्भाशय की वह परत जो मोटी होकर तैयार हो रही थी, टूटकर रक्त स्राव के रूप में बाहर निकल जाती है इसे मासिक धर्म कहते हैं।
यह एक ऐसा विषय है जिसपर लोग विशेष चर्चा करने से हिचकते हैं। इसको लेकर कई चुनौतियां हैं जिस पर हम सबको विचार करने की आवश्यकता है।
*चुनौतियां*
धार्मिक स्तर- हर धर्म में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को अपवित्र माना जाता है और धार्मिक स्थलों पर उनका प्रवेश निषेध होता है।
सामाजिक स्तर- सामाजिक स्तर-पर इन मुद्दों पर कोई खुलकर बात नहीं करता।
शैक्षिक स्तर- शैक्षणिक संस्थानों में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता।
सरकारी स्तर- सेनेटरी नेपकिन निर्माण की गुणवत्ता 1980 BIS मानक पर आधारित है जो काफी पुराना है। जिसमें बदलाव की जरूरत है।
स्वास्थ्य स्तर- महिलाओं को मासिक धर्म प्रबंधन के प्रति उदासीन पाया गया है।
इस तरह न जाने और कितनी चुनौतियां और भ्रातियां हमारे समक्ष है। ग्रामीण इलाकों में इसकी स्थिति और चिंतनीय है। केंद्र सरकार की सबला योजना और फ्री पैड योजना को राष्ट्रीय स्तर पर फैलाने की आवश्यकता है। साथ ही साथ हर स्कूल कालेज और अस्पताल में सेनेटरी पैड की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। हर विभाग में कार्यरत महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान २ दिनों का विशेष अवकाश दिया जाना चाहिए। सेनेटरी पैड को यहां वहां फेंक कर संक्रमण नहीं फैलाना चाहिए। डिस्पोजल सेनेटरी नेपकिन को बायोडिग्रेडेबल बनाना चाहिए। अब रुढ़िवादी और पुराने सोंच से खुद को निकालने की आवश्यकता है और इन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।।
*प्रियंका प्रिया*
सहायक शिक्षिका

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