विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस - मधु कुमारी - गद्य गुँजन

विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस – मधु कुमारी

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सर्वप्रथम हम यह जान लें कि : – महावारी क्या है ???

माहवारी अर्थात लड़कियों / किशोरियों के शरीर में हारमोंस के होने वाले बदलाव है जो शरीर के अंदरूनी हिस्से से रक्त के माध्यम से बाहर निकल जाती है । सामान्यतः इस क्रिया के होने का समय 11 से 13 वर्ष का होता है । यह प्रत्येक महीने एक चक्र के रूप में निरन्तर होती रहती हैं जिसे मासिक धर्म के नाम से भी जाना जाता है । सामान्यतः यह किया 3 से 7 दिनों तक चलते रहती है ।
इस दिवस की आवश्यकता इसलिए है कि एक ऐसे विश्व का निर्माण करना जिसमें लड़कियों को अपनी निजता, सुरक्षा एवं गरिमा के साथ-साथ अपने मासिक धर्म को स्वस्थ तरीके से प्रबंधित करने की जानकारी एवं आजादी मिल सके ।
किंतु अफसोस आज के बीच विकासशील दौर और स्वतंत्र माहौल में भी हम इस विषय में बात नहीं करना चाहते हैं और कोई भी दूसरा मुद्दा हो हम बेवाक बोलना पसंद करते हैं । पर जैसे ही बात हमारी पर्सनल समस्याओं से संबंधित होती है, हम झिझकते हैं, शर्माते हैं, सुकचाते हैं और परिणाम इसका भयावह बन जाता है क्योंकि हम अपनी समस्या को दूसरे के समक्ष नहीं रख पाते हैं । किसी से इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा नहीं कर पाते । अपितु इसका यह परिणाम सामने आता है कि लड़कियों को असहनीय पीड़ा और बीमारी का शिकार होना पड़ता है । इसलिए अब जरूरत है उन्हें इसके महत्वपूर्ण जानकारी से अवगत कराने का इससे संबंधित स्वच्छता की ओर आकर्षित कर समझाने का ।
इस संबंध में सर्वप्रथम पहला प्रयास 2014 में जर्मनी के ” वाश यूनाइटेड ” नाम के एक एनजीओ ने एक अहम कदम ” महावारी स्वच्छता दिवस ” के रूप में मनाने की शुरुआत की । आवश्यक तथ्य तो यह है कि इसे 28 तारीख इसलिए चुना गया क्योंकि आमतौर पर महावारी 28 दिनों के भीतर आते हैं और इसका पीरियड 5 दिनों का होता है इसलिए इसे मनाने के लिए वर्ष के पांचवे महीने अर्थात मई महीने को चुना गया है और तारीख 28 रखा गया । अर्थात 28 मई को ” विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस ” मनाया जाने लगा । पर महिलाओं के झिझक के कारण इसका दुष्परिणाम आय दिन दिखाई पड़ता है ।

* प्रायः महिलाएं पीरियड्स में कपड़े का इस्तेमाल करती हैं और उसे घर में सब से छुपा कर सुखाती है जिससे उसमें कीटाणु रह जाते हैं जो रोग का कारण बनता है । क्योंकि उसमें हवा और खुली धूप नहीं लगती है ।
* कपड़ा से बेहतर ” सेनेटरी नैपकिन ” का इस्तेमाल करना सुरक्षित होता है ।
* सैनिटरी नैपकिन को 6 से 7 घंटे के अंतराल पर बदला जाना चाहिए।
* समय-समय पर अपने प्राइवेट पार्ट की भली-भांति सफाई करते रहना चाहिए ।
* पीरियड्स के समय बिस्तर की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
* डेटोल या कोई और कीटनाशक नहाने के पानी में इस्तेमाल करना चाहिए और कपड़ों को भी उसी पानी में धोना चाहिए ।
* इस दौरान अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए ।
* हल्का व्यायाम भी करते रहना चाहिए ।

” सावधनी बरतें, सुरक्षित रहें ।
माहवारी के प्रति सबको जागरूक करें ।। ”

” काहे का शरमाना, छोड़ो अब तुम घबराना
माहवारी के दिनों में स्वच्छता को अपनाना । “

मधु कुमारी
उ०म०वि०भतौरिया
कटिहार ।

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