गद्य गुँजन आलेख AI… सुविधा या साजिश : डॉ स्वराक्षी स्वरा

AI… सुविधा या साजिश : डॉ स्वराक्षी स्वरा


Swarakshi

AI…आधुनिक युग का सबसे तेज़ हथियार। जो बिना खून बहाये, बिना महसूस कराए,धीरे-धीरे हमारी सोच हमारी रचनात्मक और हमारी मेहनत का कत्ल कर रहा है और हम हैं कि इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि समझकर खुश हो रहे हैं। सच है AI ने सुविधाएं तो बहुत दीं हैं,पर इसने हमसे वह छीनना शुरू कर दिया है जो हमें इंसान बनाता था।

AI के आने से एक ओर जहां जिंदगी आसान हुई है वहीं दूसरी और इसका सबसे बड़ा नुकसान हमारे आत्मा पर हुआ है। पहले हम सोचते थे और फिर लिखते थे। अब हम झट AI से सोचवाते हैं और फट से बड़े बड़े आलेख तक लिख डालते हैं और खुद को लेखक मान लेते हैं। पहले हम घंटों लाइब्रेरी में किताबें ढूंढते थे। अब एक क्लिक में उत्तर आ जाता है । सुविधा तो मिली पर इस सुविधा ने हमसे हमारी जिज्ञासा और सोचने की शक्ति को छीन लिया है।
यह एक ऐसा हथियार बनकर आया है जो हमारा खून नहीं बहाता,बल्कि हमसे हमारा नजरिया ही छीने जा रहा। इतना ही नहीं ये हमारी नौकरियों को भी खाए जा रहा है। एक कलाकार महीने भर में जो पेंटिंग बनाता है AI उसे 10 सेकंड में बना देता है। एक लेखक रात-रात भर जागकर कहानी लिखता है,कविताएं लिखता है, आलेख लिखता है। उसकी कहानी की नकल पल भर में AI कर लेता है । इससे जो कलाकार अपनी साधना,अपना धन और अपना समय बर्बाद कर किसी कला का सृजन करते हैं अंत में उसके हाथ में निराशा लगती जा रही है ।
सबसे बड़ा क़त्ल तो हमारी रचनात्मकता का हो रहा है। हमें लग रहा है हम आधुनिक हो रहे हैं । हम चतुर हो रहे हैं, जबकि सच ये है कि हम धीरे धीरे AI पर निर्भर होते जा रहे हैं। हम सोचना भूलते जा रहे हैं। और जब मनुष्य सोचना हो छोड़ देगा तो उसका भविष्य कौन और कैसे लिखेगा? ये चिंतनीय विषय है।
AI बुरा नहीं है, पर AI का अंधा उपयोग मानव जाति के लिए मीठा ज़हर जरूर है। जो धीरे धीरे अपना असर दिखाएगा और पूरी क़ौम को समाप्त कर देगा।
आधुनिकता का ज्ञान होना बुरी बात नहीं,लेकिन आधुनिक बनने के चक्कर में अपनी संस्कृति,अपनी मिट्टी से दूर चले जाना अत्यंत घातक है। अभी भी समय है हमें तय करना होगा कि हमें AI का मालिक बनना है या उसका ग़ुलाम।

डॉ स्वराक्षी स्वरा 
मध्य विद्यालय हाजीपुर आवासबोर्ड खगड़िया
खगड़िया बिहार

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