गद्य गुँजन आलेख,दिवस विशेष गौरैया : आशीष अम्बर

गौरैया : आशीष अम्बर



अन्तर्राष्ट्रीय गौरैया दिवस – 20 मार्च

बिहार का राजकीय पक्षी : – गौरैया ।

वह कौन – सी चिड़िया है जो हरदम तुम्हारे आस – पास ही होती है ? जो तुम्हारे इतने पास होती है कि तुम उसे कभी पिंजरे में बंद नहीं करते, कभी उसे मारते और तंग भी नही करते ? जिसकी चहचहाहट से गाँव – घर गुलजार रहता है? जो होती है निडर और तुम्हारे सामने से चुग ले जाती है दाना और उड़ जाती है फुर्र – से ? जिसके सामने लोग खुद ही दाना फेंक देते हैं, कभी – कभी थाली में परोसा हुआ भात भी ? वह आखिर कौन – सी चिड़िया है जिसका घर में होना शुभ माना जाता है, और हां , जो रहती है तुम्हारे ही घर में तुम्हारे ही साथ ?
अरे , धत् तेरे की ! वह तो नन्ही , प्यारी – प्यारी अपनी गौरैया ही तो है! अब कोई कहे कि उसने गौरैया नही देखी है तो यह अजीब बात है ! वह तो रहती है हमारे ही साथ , जैसे कि परिवार के अन्य लोग । उसे खूब भाता है रहने के लिए पक्के घर के किसी कमरे का रोशनदान , दीवार में कोई छेद , या फिर लैम्पशेड ! जो जगह उसे भा जाती है बस उसी जगह वह तिनके बटोरना शुरू कर देती है और बना देती है एक आरामदेह घोंसला । घोंसला बनाना और उसकी देख – भाल करना – यह काम नर – मादा दोनों मिलकर करते हैं । जब घोंसले में अंडे हों और मादा कहीं बाहर दाना चुगने निकलती है तो नर अंडे की रखवाली करता है । और एक बार जब अंडों से चूजे बाहर आ जाएं तब तो इनकी दौड़ – धूप देखते ही बनती है । अरे भाई , घोंसलों में नए मेहमान आए हों तो उनकी खातिरदारी तो करनी ही पड़ती है न । वह भी मेहमान जब खुद अपने बच्चे हों तब तो कहना ही क्या । उनके लिए नरम दाने चुग कर लाना और प्यार से उनके मुंह में खिलाना – यह कितना बड़ा लेकिन आनंददायक काम है! फिर जब चूजे बड़े हो जाते हैं तो माता – पिता के साथ बाहर निकलना शुरू कर देते हैं । माता – पिता उन्हें उड़ना तो सिखाते ही हैं , दाना चुगना, कीड़ों – मकोड़ों का शिकार करना , अपनी रक्षा करना और दिन – दुनिया की और भी बातें सिखाते हैं ।

गौरैया धूसर भूरे रंग की चिड़िया होती है जिसके पंखों पर गहरी बादामी या काली धारियां होती हैं । इसका आकार लगभग छह इंच का होता है । इसकी चोंच छोटी लेकिन नुकीली होती है । नर की चोंच के नीचे का हिस्सा काला होता है, लगता है जैसे उसने दाढ़ी रख ली हो । नर का रंग कुछ गहरा होता है । गौरैया बेहद सक्रिय चिड़िया है । हर समय इसे कुछ – न – कुछ करने की पड़ी होती है । वैसे, यह खूब चौकन्नी भी रहती है, आस – पार खतरे भी तो कम नहीं ।

गौरैया कीड़े – मकोड़े और अनाज के दाने चाव से खाती है । इसे फूलों की कलियां भी पसंद है । थालियों में बची जूठन पर भी यह बाखूबी हाथ साफ करती हैं । वैसे, यह बड़े समूहों में रहे तब पकती फसलों को भी कभी – कभार नुकसान पहुंचाती हैं ।

हमारे देश में गौरैया हर कहीं पाई जाती है, ऊँचे पहाड़ों से लेकर समुद्र के किनारों तक । हम मनुष्यों से इसकी पुरानी दोस्ती है । अक्सर यह हमारे गाँव – बस्तियों में ही अपना ठिकाना बनाती है । तुम्हें तो पता ही है, गाँवों में ज्यादातर घर खपरैल या फिर फूस के होते हैं । खपरैल घरों में इसे ज्यादा सुभीता होता है । शहतीर या दो बल्लियों के बीच थोड़े – से तिनके डाल दिए और बना लिया घोंसला । घर अगर फूस का हुआ , तब तो कहना ही क्या ? द्वारपाटन या ओलती के नीचे की चंचरी में – जहां जी किया , घोंसले बनाकर बस गई । गौरैया सदियों से हमारी मित्र है – दोस्त जो कई तरह से हमारी मदद भी करती है ।

बिहार सरकार द्वारा इसे राजकीय पक्षी के रूप में स्वीकार किया गया है । इसके संरक्षण के लिए कई कारगर उपाय भी किए जा रहे हैं ।

आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply