Author: Anupama Priyadarshini

अमावस की रात – स्नेहलता द्विवेदी “आर्या”अमावस की रात – स्नेहलता द्विवेदी “आर्या”

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लघु कथा अमावस की अँधेरी रात! मैं अकेली पगडंडियों से होती हुई गाँव की ओर जा रही थी। हाथ में[...]

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Sanjiv Priyadarshi

मैं ही देश हूँ – संजीव प्रियदर्शीमैं ही देश हूँ – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 9:29 pm

लघुकथा शहर कई दिनों से अशांत है। लोगों में नफ़रत और भय का माहौल है।कल तक जो लोग आपस में[...]

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Mukesh Kumar Mridul

स्वभाव – मुकेश कुमार मृदुलस्वभाव – मुकेश कुमार मृदुल

0 Comments 8:57 pm

लघुकथाअपने घर के बैठकखाने में टयूशन पढ रहे सात वर्ष का लडका पढने के क्रम में रुककर बोला – “अब[...]

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Manish

समर्पण से शक्ति तक, पांच साल बेमिसाल – डॉ मनीष कुमारसमर्पण से शक्ति तक, पांच साल बेमिसाल – डॉ मनीष कुमार

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#पांच साल बेमिसाल बिहार के शिक्षा विभाग में शिक्षकों ने स्वप्रेरणा से एक ऐसी गतिविधि से जुड़ते गए जहां से[...]

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Sanjiv Priyadarshi

पुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शीपुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शी

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लघुकथा ”गांव में जो सबसे बढ़कर धर्मनिष्ठ होगा, आज की सभा में वे ही पुरस्कार के हकदार होंगे।” ग्राम-समिति की[...]

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Bimal Kumar

“समाज को बदल डालो – विमल कुमार ‘विनोद’“समाज को बदल डालो – विमल कुमार ‘विनोद’

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— एक रंगमंचीय नाटक ओपनिंग दृश्य- सुबह का समय मंदिर का दृश्य,बहुत सारे लोग मंदिर में हैं,घंटी बजती है,आरती शुरू[...]

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Sanjiv Priyadarshi

बोध – संजीव प्रियदर्शीबोध – संजीव प्रियदर्शी

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एक लघुकथा लकड़ा जेब से पिस्तौल निकालकर ज्यों ही गोलियाँ चलाता कि यकायक उसके हाथ रुक गये। यह क्या? ये[...]

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Mohammad Jahir

यार, तूने तो सब को रूला दिया – मो.जाहिद हुसैनयार, तूने तो सब को रूला दिया – मो.जाहिद हुसैन

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    वह दोस्ती ही क्या? जिसमें सब मीठा ही मीठा हो। दो दोस्त होंगे तो बीच-बीच में खींचातानी भी[...]

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Sanjiv Priyadarshi

परिवार – संजीव प्रियदर्शीपरिवार – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 6:21 pm

अपनी सहेली द्वारा ससुराल के बारे में पूछे जाने पर मनोरमा बोलने लगी -‘ अरे राधा, मैं ससुराल में भले[...]

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