लघु कथा अमावस की अँधेरी रात! मैं अकेली पगडंडियों से होती हुई गाँव की ओर जा रही थी। हाथ में[...]
Author: Anupama Priyadarshini
मैं ही देश हूँ – संजीव प्रियदर्शीमैं ही देश हूँ – संजीव प्रियदर्शी
लघुकथा शहर कई दिनों से अशांत है। लोगों में नफ़रत और भय का माहौल है।कल तक जो लोग आपस में[...]
कहानी – संस्कृति चौधरीकहानी – संस्कृति चौधरी
कहानीदरभंगा जिले में एक देवेश नाम का बालक रहता था। वह अपनी दादी से बहुत प्यार करता था। और दादी[...]
स्वभाव – मुकेश कुमार मृदुलस्वभाव – मुकेश कुमार मृदुल
लघुकथाअपने घर के बैठकखाने में टयूशन पढ रहे सात वर्ष का लडका पढने के क्रम में रुककर बोला – “अब[...]
समर्पण से शक्ति तक, पांच साल बेमिसाल – डॉ मनीष कुमारसमर्पण से शक्ति तक, पांच साल बेमिसाल – डॉ मनीष कुमार
#पांच साल बेमिसाल बिहार के शिक्षा विभाग में शिक्षकों ने स्वप्रेरणा से एक ऐसी गतिविधि से जुड़ते गए जहां से[...]
पुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शीपुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शी
लघुकथा ”गांव में जो सबसे बढ़कर धर्मनिष्ठ होगा, आज की सभा में वे ही पुरस्कार के हकदार होंगे।” ग्राम-समिति की[...]
“समाज को बदल डालो – विमल कुमार ‘विनोद’“समाज को बदल डालो – विमल कुमार ‘विनोद’
— एक रंगमंचीय नाटक ओपनिंग दृश्य- सुबह का समय मंदिर का दृश्य,बहुत सारे लोग मंदिर में हैं,घंटी बजती है,आरती शुरू[...]
बोध – संजीव प्रियदर्शीबोध – संजीव प्रियदर्शी
एक लघुकथा लकड़ा जेब से पिस्तौल निकालकर ज्यों ही गोलियाँ चलाता कि यकायक उसके हाथ रुक गये। यह क्या? ये[...]
यार, तूने तो सब को रूला दिया – मो.जाहिद हुसैनयार, तूने तो सब को रूला दिया – मो.जाहिद हुसैन
वह दोस्ती ही क्या? जिसमें सब मीठा ही मीठा हो। दो दोस्त होंगे तो बीच-बीच में खींचातानी भी[...]
परिवार – संजीव प्रियदर्शीपरिवार – संजीव प्रियदर्शी
अपनी सहेली द्वारा ससुराल के बारे में पूछे जाने पर मनोरमा बोलने लगी -‘ अरे राधा, मैं ससुराल में भले[...]