शीर्षक -बुरे कर्मों का बुरा फल।(राजा धृतराष्ट्र की कहानी)
महाभारत का धृतराष्ट्र जो दुर्योधन का पिता था।वह पिछले जन्म में एक राजा था।उसको शिकार करने का बहुत शौक था।जब वह शिकार करने के लिए घोड़े पर सवार होकर जाता था,वह अपने साथ में एक बड़ी सुई एवं धागे लेकर जाता था और नदी किनारे उतरकर पानी से एक कछुआ निकालता,उसके दोनों आँखों को सुई धागे से सिलता फिर उस कछुए को पानी में छोड़ देता , ऐसा करना उसको बहुत अच्छा लगता था।इसी तरह रोज सुबह, शाम शिकार करने जाता और पानी से कछुए निकाल कर, उसके दोनों आँखों को सिलकर पानी में दे देता ।
एक दिन की बात है, राजा प्रतिदिन के भाँति आज भी शिकार करने गया कछुआ का आँख सिलकर पानी में दे दिया,कछुआ ने राजा को श्राप दिया कि तुम जिस तरह से हम सबों के आँखों को सिलकर अंधा करके पानी में दे देते हो ,हम सबों को बहुत दुख एवं कष्ट होता है,जाओ हम सब तुम्हें श्राप देते हैं कि अगले जन्म में तुम अंधा होगा ।
वही कछुआ का श्राप के कारण अगले जन्म में राजा धृतराष्ट्र बनकर जन्म लिया,जो जन्म से वह दोनों आँखों से अंधा था।
इसलिए बुरे कर्मों का फल बुरा होता है।
नीतू रानी, विशिष्ट शिक्षिका।
स्कूल -म०वि०रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।