रोमा आज जैसे ही स्कूल पहुँची तभी उसकी सहेली शिखा ने बोला,अरे रोमा तेरे कपडे में कैसा दाग लगा है?
यह सुनते ही रोमा झट से स्कूल प्रांगण में लगे पेड़ के पीछे चली गयी,और कपड़े में देखा तो खून का धब्बा लगा था।वह डर से काँपने लगी तभी उसकी सहेली शिखा बोली ,क्या हुआ रोमा,क्या तुझे घाव हुआ है क्या और तू इतना काँप क्यों रही है?
रोमा ने बोला कोई घाव नही हुआ है पर ये खून….खून कहाँ से लग गया है,पता नही…मुझे डर लग रहा है।मुझे कुछ हो तो नही गया।
तभी उधर से गुजरती शिक्षिका ने जब दो लड़कियों को आपस में खुसर फुसर करते देखा तो उनके पास चली आईं।
और पूछा क्या हुआ बच्चियों तुम दोनों यहाँ क्या कर रही हो?और फिर जब नजर रोमा पर पड़ी तो बोलीं
रोमा कुछ हुआ क्या ,तुम्हारा चेहरा उतरा हुआ क्यों है?
तब शिखा ने बोला मैम इसके कपड़े में पीछे खून लग गया है,जबकि कोई घाव भी नही।
मैडम ने कहा इसमें घबड़ाने की कोई बात नही बेटा, चलो मेरे साथ,फिर उसे लेकर स्टाफ रूम में गयीं और अपने बैग से पैड निकाल कर दिया और उसे उपयोग करने का तरीका बताया।
स्टॉफ रूम की अलमारी में यूनिफार्म का एक स्कर्ट था उसे बदलने को कहा।
और बोली ये सब करके आओ फिर मैं बात करती हूँ।
रोमा जब बाहर आई तब उसे समझाया ,यह माहवारी है जो बिल्कुल प्राकृतिक है यह हर लड़की को होता है।
महीने के चार दिन कम से कम इस प्रक्रिया से गुजरना होता।इसमें तेल मसाले वाली चीजें कम खानी चाहिए, साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
अगर परेशानी लगे तो भरपूर आराम और हल्के व्यायाम भी करना चाहिए।
चलो तुम अब घबड़ाओ बिल्कुल मत ,मैं तुम्हारी माँ को बुलवा देती हूं तुम घर जाकर आराम करो।
फिर उन्होंने रोमा से नंबर लेकर उसके घर फोन कर उसकी माँ को बुलवाया।
रोमा सामान्य हो गयी और मुस्कुराते हुए मैम को शुक्रिया कह घर गयी।
रूचिका
प्रधान शिक्षिका
राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार