हिन्दी दिवस पर अंग्रेज़ी भाषा का प्रभाव-शफक फातमा - गद्य गुँजन

हिन्दी दिवस पर अंग्रेज़ी भाषा का प्रभाव-शफक फातमा

हिन्दी दिवस पर अंग्रेज़ी भाषा का प्रभाव

          बात उन दिनों की है जब मैं इंटरमीडिएट की छात्रा थी। हिन्दी दिवस समारोह के लिए हम सब विद्यार्थी इकट्ठा हुए थे। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय परिसर में रखा गया था। मुख्य अतिथि के रूप में प्राचार्य के साथ कई अन्य प्रोफेसर भी थे। महाविद्यालय का प्रांगण एवं सभागार खचा-खच भरा हुआ था। थोड़ी देर में ही मंच पर से एक व्यक्ति ने एंकरिंग करते हुए कार्यक्रम की शुरुवात की। उन्होंने हिन्दी दिवस के मनाने और इसके महत्व के बारे में जानकारी भी दी कि 14 सितम्बर को प्रत्येक वर्ष हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन भारत केे संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी गयी हिन्दू भाषा को भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषा घोषित किया था। भारतीय संविधान सभा ने 14 सितम्बर 1949 को भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को अपनाया। हालांकि इसे 26 जनवरी 1950 को देश के संविधान द्वारा आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल करने के विचार को मंजूरी दी गयी। प्रत्येक वर्ष हिन्दी दिवस मनाने के पीछे उद्देश्य है कि हिन्दी के महत्व को बढ़ावा दिया जाय, विशेषकर उन पीढ़ी के बीच जो अंग्रेज़ी से प्रभावित हैं। यह युवाओं को अपनी जड़ों के बारे में याद दिलाने का एक तरीका है, इत्यादि।

हिन्दी दिवस समारोह के महत्व के अनुसार कोई भी व्यक्ति या विद्यार्थी ऐसी वेश- भूषा या हाव-भाव में नहीं था जिससे कि पता चले कि वो आज खास कर हिन्दी दिवस उत्सव को धूम-धाम से मनाने निकला हो। अधिकांश व्यक्ति कोट, पैंट और टाई में ही दिख रहे थे। विद्यार्थी भी अपने-अपने हिसाब से वस्त्र धारण किये हुए थे। एक दो सज्जन व्यक्ति ऐसे भी थे जिन्होंने कुर्ता पजामा पहना हुआ था जिससे कि भारतीय संस्कृति की झलक मिल रही थी।उन्हें देखकर कोई भी आसानी से समझ सकता था कि वे इस समारोह के लिए सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं।

मंच पर एंकर बारी-बारी से आगंतुक को आने का आग्रह करते और उन्हें हिन्दी दिवस पर दो शब्द साझा करने को कहते। निमंत्रित दिग्गजों ने अपने-अपने विचार को सबके समक्ष रखा। एक मुख्य अतिथि जो अंग्रेज़ी पहनावे से लदे हुए थे, उनके विचार ने तो मेरे मन- मष्तिष्क पर ऐसा प्रभाव डाला जिसने आज मुझे ये आलेख लिखने को प्रेरित किया। मंच पर आमंत्रित किये जाने के साथ ही वे माइक पकड़कर शुरू हो गए- Hello everyone, as you know that we all are here to celebrate Hindi Day today. Hindi language is indeed our national language. It shows our Indian culture. We must appriciate Hindi language and never be ashamed of using this in our daily life. Hindi language is very sweet and easy language.(“हेल्लो एवरीवन, ऐस यू नो दैट वी आल आर हेयर टू सेलिब्रेट हिन्दी डे टुडे। हिंदी लैंग्वेज इज इंडीड आवर नेशनल लैंग्वेज। इट शोज आवर इंडियन कल्चर। वी मस्ट एप्रिशिएट हिन्दी लैंग्वेज एंड नेवर बी एशेमड ऑफ युसिंग दीस इन आवर डेली लाइफ। हिंदी लैंग्वेज इज रियली वेरी स्वीट एंड इजी लैंग्वेज।)

उनका भाषण करीब-करीब 20 मिनट तक चला जिसमे उन्होंने हिंदी भाषा की विशेषताओं को अंग्रेज़ी में प्रस्तूत किया। खैर, भाषण खत्म होते ही पूरा परिसर तालियों की शोर से गूंज उठा। अब ये तालियाँ हिंदी दिवस को देखते हुए थे या हिंदी दिवस पर अंग्रेज़ी के प्रभाव का पता नहीं। कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गए। उसके बाद भीड़ धीरे-धीरे कम होने लगी। मैं भी अपने साथियों के साथ कॉलेज से घर जाने के लिए निकल गयी।

आज हिन्दी दिवस के मौके पर जब मैं उस दिन को याद करती हूँ तो लगता है कि आज 2020 के इस युग में तो लोग और भी आधुनिक हो गए हैं। अंग्रेज़ी भाषा का प्रयोग और प्रभाव इस क़दर बढ़ गया है कि अब हिन्दी भाषा के प्रयोग से लोगों को झिझक महसूस होने लगी है। ऐसा लगता है मानो हिन्दी अपनी महत्व खो रही है। परन्तु वास्तविकता य। है कि जहाँ भी हम जाएँ हमारी भाषा, संस्कृति और मूल्य हमारे साथ बरकरार रहनी चाहिए। आज के समय में युवा वर्ग को अंग्रेज़ी की तरफ एक झुकाव है जिसे समझा जा सकता है क्योंकि अंग्रेज़ी का इस्तेमाल दुनियाँ भर में किया जाता है। मगर हमें अपनी संस्कृति को जीवित रखना है। भारत पश्चिमी रीति-रिवाज से बहुत प्रभावित है मगर कुछ लोग ये नहीं समझते हैं कि भारतीय संस्कृति, विरासत और मूल्य पश्चिम की संस्कृति की तुलना में कहीं अधिक समृद्ध हैं। 14 सितम्बर को मनाया जाने वाला हिन्दी दिवस हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति को सम्मान देने का एक तरीका है।

शफ़क़ फातमा
प्राथमिक विद्यालय अहमदपुर
प्रखण्ड- रफीगंज
ज़िला- औरंगाबाद

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