कला समेकित शिक्षा द्वारा विज्ञान शिक्षा-सुधांशु कुमार चक्रवर्ती - गद्य गुँजन

कला समेकित शिक्षा द्वारा विज्ञान शिक्षा-सुधांशु कुमार चक्रवर्ती

कला समेकित शिक्षा द्वारा विज्ञान शिक्षा

          किसी भी वस्तु के विशेष एवं क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कहते है। विज्ञान विषय में अध्ययन कार्य बच्चों के बीच वर्ग छः से शुरू हो जाती है। विज्ञान विषय के शिक्षण कार्य में कला समेकित शिक्षा का स्थान महत्वपूर्ण है।

विज्ञान विषय अंतर्गत जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान एवं भौतिक विज्ञान आते हैं। विज्ञान को समझने एवं सीखने के लिए चित्रकला का सहारा लेते हैं। जंतु शास्त्र में अमीबा की रचना से लेकर मनुष्य के शरीर में मौजूद तंत्रिका तंत्र की रचना तक में अध्ययन के लिए चित्रकला की आवश्यकता होती है। इसी तरह वनस्पति शास्त्र के अंतर्गत पेड़-पौधों के अध्ययन में चित्रकला की आवश्यकता होती है। प्रयोगशाला में एक कोशिकीय जंतु से लेकर बहुकोशिकीय जंतु तक के लिए चित्र बनाने की आवश्यकता होती है। भौतिक विषय में बल, गति, घर्षण, प्रकाश आदि का अध्ययन भी चित्र द्वारा ही किया जाता है। रसायन विज्ञान में भी चित्र की आवश्यकता होती है। सूक्ष्मजीव विज्ञान में भी अध्ययन के लिए चित्र की आवश्यकता होती है। जितना बेहतर पेड़-पौधे एवं जीव-जंतु के चित्र विद्यार्थी बनाएँगे उतना ही बेहतर भविष्य में जीववैज्ञानिक बनेंगे।

खेल-खेल में एक शिक्षक बच्चों के बीच विज्ञान का शिक्षण कार्य कर सकता है। एक गेंद के माध्यम से बच्चों के बीच खेल-खेल में बल की परिभाषा बतला सकते हैं। घर के अंदर किचेन रूम में उपयोग होने वाले तांबा एवं चम्मच के माध्यम से बच्चों को उत्तल एवम अवतल लेंस या दर्पण के बारे मेें समझाया जा सकता है। एक छोटी रबर की गोली को खेल के माध्यम से श्यामपट्ट का प्रयोग करते हुए प्रकाश का अपवर्तन, परावर्तन समझाया जा सकता है। रबर की छोटी गोली को जमीन पर गिराएँगे और वह जमीन से टकरा कर ऊपर की दिशा में उछलेगा तो बच्चों को समझा सकते हैं कि कोई प्रकाश की किरण किसी वस्तु से टकराकर वापस लौटती है तो यह क्रिया परावर्तन कहलाती है और जब प्रकाश की किरण किसी वस्तु से टकराकर वस्तु से टकराती है तो अपवर्तन कहलाती है। श्यामपट्ट का प्रयोग करते हुए चित्र के माध्यम से परावर्तन का नियम बता सकते हैं कि आपतित किरण एवं परावर्तित किरण एवम अभिलम्ब एक ही बिंदु पर होता है और आपतन कोण और परावर्तन कोण आपस मेें बराबर होते हैं।

खेल-खेल में कलात्मक ढंग से न्यूटन का नियम बच्चों को बतला सकते हैं। टी. एल. एम. बनवाकर या मिट्टी का खिलौना या श्यामपट्ट या चार्ट पेपर पर चित्र द्वारा अणु परमाणु की रचना बच्चों को बतला सकते हैं। मिथेन, ईथेन की रचना, जल, ऑक्सीजन, कार्बन डायऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन की रचना बच्चों को बतला सकते हैं।

नाटक के माध्यम से संतुलित आहार, फुड चेन सिस्टम बच्चों को बतला सकते हैं। सूक्ष्मजीव एवं इसके प्रकार को नाटक के माध्यम से बच्चों को बतला सकते हैं। कोशिका रचना को वर्ग कक्ष में पात्रों में ढालकर संवाद द्वारा टी. एल. एम. का प्रयोग करते हुए एकांकी नाटक के माध्यम से कोशिका झिल्ली, जीवद्रव, केंद्रक, राइबोसोम, लाईसोसोम, माइटोकोंड्रिया, गोल्जी बॉडी, एंडो प्लाजमिक रेटिकुलम, गुणसूत्र आदि बच्चों को आराम से बता सकते हैं।

श्यामपट्ट पर चित्र के माध्यम से जड़ एवं इसके प्रकार, रूपांतरण, पत्ते की रचना, इसके प्रकार, रूपांतरण, तना एवं इसके कार्य, रूपांतरण, फूल एवं इसके प्रकार, रचना आदि बच्चे आसानी से समझ जाएँगे। फल एवं उसके प्रकार के बारे में चित्र के माध्यम से बच्चे जान जाएँगे। सूक्ष्मजीव, इसके प्रकार, प्रदूषण एवं इसके प्रकार एवं इससे होने वाले हानि के बारे में नाटक के माध्यम से भी बच्चे ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

इस तरह हम देखते हैं कि कला समेकित शिक्षा के माध्यम से विज्ञान पर शिक्षण कार्य किया जा सकता है।

सुधांशु कुमार चक्रवर्ती
स्टेशन रोड हाजीपुर
वैशाली

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