कृषि के लिए बैल का उपयोग-सुमोना घोष - गद्य गुँजन

कृषि के लिए बैल का उपयोग-सुमोना घोष

कृषि के लिए बैल का उपयोग 

          जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की तो सभी जीव-जंतु धरती पर अवतरित हुए । पेड़ पौधे, जलचर, नभचर एवं अंत में मनुष्य की रचना की गई। अन्य सभी जीव जंतु पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत आहार श्रृंखला के माध्यम से आहार ग्रहण करने लगे।
मनुष्य तो सृष्टि में सबसे महान, बुद्धिमान एवं विधाता की उत्कृष्ट रचना है। सभी देवताओं ने विचार विमर्श किया कि मानव के भोजन की व्यवस्था कैसे की जाए। देवताओं ने विचार किया कि भूमि पर जो संसाधन उपलब्ध है, उन संसाधनों से सृष्टि के मनुष्य की क्षुधा तृप्ति संभव है यदि मनुष्य संयम से एवं विवेकपूर्ण ढंग से उनका उपयोग करें।

          परंतु समस्या यह थी कि देवताओं का यह संदेश लेकर धरती पर जाएगा कौन? सभी देवताओं ने आपस में विचार-विमर्श किया एवं यह सुनिश्चित किया गया कि महादेव का वाहन नंदी इस कार्य के लिए उपयुक्त है। ब्रह्मा जी ने नंदी को एक दिए में जौ भरकर देते हुए कहा कि “इसे मनुष्य के भोजन हेतु धरती पर बिखेर देना साथ ही मनुष्य को यह संदेश देना कि वह सप्ताह के 6 दिन भजन-पूजन करें एवं एक दिन भोजन ग्रहण करें।”

नंदी खुशी-खुशी धरती की ओर चल पड़े परंतु मार्ग में वे यह भूल गए कि धरती पर जाकर कहना क्या है?नंदी ने धरती पर आकर जौ तो बिखेर दिया परंतु मनुष्य को यह संदेश भी दे दिया की वे सप्ताह में 6 दिन भोजन ग्रहण करें एवं एक दिन भजन पूजन करें।

जब नंदी लौटकर कैलाश पर्वत पर देवताओं के पास पहुंचे एवं उन्होंने सारी बातें देवताओं को बताई, तो सभी देवता गण आश्चर्यचकित रह गए और यह निश्चित किया गया कि पृथ्वी पर मनुष्यों के भोजन की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी भी बैल को ही उठानी पड़ेगी। उसी दिन से कृषि कार्य हेतु बैल का उपयोग किया जाने लगा। इतिहास में भी इसी बात के प्रमाण मिलते हैं कि धरती पर सबसे पहले जौ का ही उत्पादन किया गया और कृषि कार्य हेतु बैल का।

सुमोना घोष

भागलपुर

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