Bimal Kumar

“पर्यावरण की तबाही”- श्री विमल कुमार “विनोद”“पर्यावरण की तबाही”- श्री विमल कुमार “विनोद”

0 Comments 8:38 pm

कास्टिंग सीन-बचाओ,बचाओ,अरे कोई तो बचाओ,बचने का कोई भी उपाय तो बताओ। चारों ओर तबाही ही तबाही नजर आ रही है।(नेपथ्य[...]

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Bimal Kumar

“औघड़”- ,पार्ट-02- श्री विमल कुमार “विनोद”“औघड़”- ,पार्ट-02- श्री विमल कुमार “विनोद”

0 Comments 7:22 pm

संक्षिप्त सार-महेश एक साधारण गरीब परिवार का लड़का जो कि गणित से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने के बाद लगातार[...]

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Sanjiv

जीत की हार-संजीव प्रियदर्शीजीत की हार-संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 3:45 pm

मनोहर अपनी बूढ़ी मां को कोर्ट के फैसले की प्रतिलिपि दिखाते हुए जरा हास मुख से बोला- ‘ मां,देखो न![...]

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Bimal Kumar

जनसंख्या-विस्फोटजनसंख्या-विस्फोट

0 Comments 3:35 pm

कास्टिंग दृश्य-शहर के चौक का दृश्य।समय-एक बजे दिन।(बहुतसारे बच्चे हाथों में कटोरा में रखीभोजन को खाने के लिये छीना-झपटी कर[...]

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Bimal Kumar

चुड़ैल का डर- श्री विमल कुमार” विनोद”चुड़ैल का डर- श्री विमल कुमार” विनोद”

0 Comments 8:35 pm

सामाजिक अंधविश्वास पर आधारित श्री विमल कुमार” विनोद” लिखित लघुकथा।यह लघुकथा सुदूर ग्रामीण क्षेत्र का है जहाँ पर गाँव के[...]

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Bimal Kumar

गरीबी की कब्र पर पनपी हँसी-श्री विमल कुमार” विनोद”गरीबी की कब्र पर पनपी हँसी-श्री विमल कुमार” विनोद”

0 Comments 8:29 pm

एक बड़े शहर के चंराहे पर सुबह के 10 बजे एक चमचमाती हुई कार ट्रैफिक पर आकर लगती है।उसी समय[...]

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Bimal Kumar

झगड़ैया”-अंगिका लघुकथा -श्री विमल कुमार”विनोद”झगड़ैया”-अंगिका लघुकथा -श्री विमल कुमार”विनोद”

0 Comments 8:03 pm

“झलिया”नाम केरो एगो पाँच बच्छर केरो लड़की जे कि भोरे सुति ऊठी केरो बाद से ही जिनगी भर गाँव घरो[...]

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Bimal Kumar

हाहाकार- श्री विमल कुमार”विनोद”हाहाकार- श्री विमल कुमार”विनोद”

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एक लघु नाटिका पृष्ठभूमि- गर्मी,गर्मी,शरीर गर्मीसे जल रहा है,जीवन जीना दूभर हो गया है,गर्मी की उमस ने तो जीना मुश्किल[...]

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Meera Singh

बैगलेस शनिवार -मीरा सिंह “मीरा”बैगलेस शनिवार -मीरा सिंह “मीरा”

0 Comments 8:14 pm

आठ वर्षीय रामू अहले सुबह बिना किसी की आवाज लगाए स्वत: उठा ही नहीं बल्कि अपने स्कूल के जूते भी[...]

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Sanjiv

जहर – संजीव प्रियदर्शीजहर – संजीव प्रियदर्शी

0 Comments 9:01 pm

सुखाराम ने बजरंगी को अपने घर बुलवाकर कहा-‘ बजरंगी भाई, इस बार कपास की खेती कर लो,चाँदी काटोगे। और हां,[...]

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