शिक्षक के तीन प्रमुख गुण:[...]
सहसा स्मरण में आती वह चहचहाहट : उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक’सहसा स्मरण में आती वह चहचहाहट : उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक’
बसंत का समय था। पेड़ों पर पतझर की आहट सुनाई देने लगी थी और कहीं-कहीं हरे पत्ते अपनी उपस्थिति का[...]
अतीत की भूल भविष्य की चुनौती : धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअतीत की भूल भविष्य की चुनौती : धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
अतीत की भूलें और भविष्य की चुनौती: क्या हम अगली महामारी के लिए तैयार हैं? विश्व महामारी दिवस हमें मानव[...]
सुरों से संस्कार तक : नई शिक्षा नीति 2020 के आलोक में विद्यालय की सांगीतिक चेतना की यात्रा : चंद्रकांत कुमारसुरों से संस्कार तक : नई शिक्षा नीति 2020 के आलोक में विद्यालय की सांगीतिक चेतना की यात्रा : चंद्रकांत कुमार
“सुरों से संस्कार तक : नई शिक्षा नीति 2020 के आलोक में विद्यालय की सांगीतिक चेतना की यात्रा” “सा विद्या[...]
भारतीय लोकपर्व और हमारी सांस्कृतिक विरासत : नई पीढ़ी की जिम्मेदारी : आशीष अम्बरभारतीय लोकपर्व और हमारी सांस्कृतिक विरासत : नई पीढ़ी की जिम्मेदारी : आशीष अम्बर
विषय वस्तु :- भारत सांस्कृतिक विविधता वाला देश है । यहाँ की परम्पराएँ , कला , भाषा , रीति –[...]
स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर – उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर – उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘
संगीत में गायक कलाकार के कण्ठ में ओ जादू सरस्वती देवी भर देती है कि उसके आवाज से पत्थर भी[...]
कवि सत्यनारायण जी : एक युग का अंत : ज्योत्सना वर्द्धनकवि सत्यनारायण जी : एक युग का अंत : ज्योत्सना वर्द्धन
बिहार के सांस्कृतिक के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। 27 अगस्त 2026 को पटना के कदमकुआँ की एक छोटी[...]
परम्परा और आधुनिकता एक-दूसरे के पूरक हैं : अमृता कुमारीपरम्परा और आधुनिकता एक-दूसरे के पूरक हैं : अमृता कुमारी
प्रस्तावना जो भी पुरानी बातें होती हैं, परम्परा वाली होती हैं। वास्तव में परम्परा एक गतिशील प्रक्रिया है, जो हम[...]
अमर शहीद भगत सिंह : हर्ष नारायण दासअमर शहीद भगत सिंह : हर्ष नारायण दास
दासता की श्रृंखला में आबद्ध भारत माता को बन्धन मुक्त कराने के आत्मोत्सर्ग कर देने वाले हुतात्माओं की श्रेणी में[...]
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : संघर्ष से शिखर तक – उमेश कुमार सिन्हाराष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : संघर्ष से शिखर तक – उमेश कुमार सिन्हा
23 सितंबर—राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जयंती पर विशेष “क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो…” जी हाँ, आपने[...]