प्रेरक कथा-कुमकुम कुमारी - गद्य गुँजन

प्रेरक कथा-कुमकुम कुमारी

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रखेंगे ध्यान

बेटा यह क्या कर रहे हो?
क्यों कचरे के बाल्टी में हाथ डाल रहे हो?

माँ मैं कचरे में से पॉलीथिन निकाल रहा हूँ।
देखो न माँ
कामवाली बाई ने कितना पॉलीथिन इसमें डाल रखी है।

हाँ तो रहने दो न।
तुम क्यों उसे छू रहे हो?

माँ पता है आज स्कूल में
मैडम बता रही थी कि
पॉलीथिन बहुत नुकसानदायक होता है।

मैडम कह रही थी
जब हम पॉलीथिन में बचा हुआ खाना
या फिर सब्जी और फल के छिलके को
डाल कर फेंक देते हैं
तो उस खाना को जानवर खाते हैं।
खाना के साथ-साथ
जानवर पॉलीथिन को भी निगल जाते हैं।
जिससे जानवर को बहुत नुकसान होता है।

माँ जानवर भी तो हमारे मित्र होते हैं न और गाय तो हमारी माँ समान होती है।हम तो रोज ही गाय के दूध को ही पीते हैं।

इसलिए माँ हमें हमारे पशुमित्र की मदद करनी चाहिए।

माँ मैडम बताती हैं
पशु तो बेजुबान होते हैं।हमें उनकी देखभाल करनी चाहिए।

हाँ बेटा तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो।
आज से मैं यह कसम खाती हूँ कि
अब आगे से हमारे घर में पॉलीथिन का प्रयोग नहीं होगा।

मेरी प्यारी माँ, मेरा प्यारा बेटा

कुमकुम कुमारी
मध्य विद्यालय बाँक, जमालपुर
मुंगेर

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