सच्ची घटना- दया शंकर गुप्ता - गद्य गुँजन

सच्ची घटना- दया शंकर गुप्ता

Daya

शाम के 7 बजे होंगे, अंश की माँ खाना बनाकर जब बाहर के रूम में बच्चों के पास आई तो देखी कि सबसे छोटा लड़का नहीं है। उसने अंश से पूछा-“छोटू कहाँ गया है?”
तो उसने बोला- ” बाहर खेलने गया होगा। मुझे नहीं पता।”
मां ने बाहर जाकर देखा तो कोई दिखाई नहीं दिया। फिर ये सोच कर कि शायद मंदिर की तरफ गया हो कुछ देर में आ जायेगा। वो बर्तन समेटने लगी और घर के कामों में व्यस्त हो गई। आधे घंटे बाद जब वो फिर आयी तो पायी कि छोटू अब तक नही आया है। अब तो उसे चिंता होने लगी, वो अब खुद गली में निकलकर आस पास में खोजने लगी कि शायद इधर उधर कहीं खेलते हुए दिख जाय, पर वो कहीं नहीं दिखा। फिर वो मंदिर के तरफ भी गयी लेकिन वहाँ भी उसे छोटू का कुछ पता नहीं मिला। अब तो उसको बेचैनी होने लगी, ” बाप रे। अब क्या करूँ। अकेले शहर में रहना है, अंश के पापा भी घर पर नहीं है, और कोई जान पहचान का भी नहीं है। अंश के पापा को बताऊंगी तो वो डाँटने लगेंगे, दादा जी तो गुस्से से लाल हो जाएंगे।।” इन्ही सब ख्यालों में डूबे हुए अब वो आस पास के घरों में पूछताछ करना शुरू कर दी।
शालू की मम्मी! आपके यहाँ मेरा बच्चा आया है क्या?
ओय दीपू! तुम्हारे यहाँ छोटू है क्या?
धीरे धीरे पूरे मोहल्ले को पता चल गया कि छोटू घर से गायब है। अब तो सभी लोग मिलकर खोजने लगे। डरते डरते अंश की माँ ने उसके पापा को भी बताया कि अपना छोटू नहीं मिल रहा है। छोटू की माँ फिर अपने भैया को बताई जो 20km दूर रहता है। जल्द ही वो भी आ गए। अब तो सभी लोग घबराने लगे कि इतनी देर हो गई, आखिर छोटू गया किधर? खोजते खोजते सुबह हो गई। छोटू का कहीं नामोनिशान नहीं मिला।
सुबह दादा जी को भी बताया गया। वो अपने स्तर से पूरा खोजबीन करना शुरू किए। फिर थाने में बच्चा गायब होने का रिपोर्ट भी लिखवाया गया। पुलिस पूरे शहर में फ़ोटो के साथ एनाउंस करवाने लगी। किसी को भी यदि मिला हो तो तुरंत सूचित करें। अंश के पापा भी तुरंत छुट्टी लेकर घर के लिए रवाना हो गए। अब तो पूरा शहर जान गया कि छोटू गायब है। सोशल मीडिया, लोकल न्यूज़ हर जगह से गुहार लगाई गई कि छोटू की सूचना मिलने पर तुरंत बताया जाय। परन्तु दोपहर हो गई कुछ पता नहीं चला। तभी एक सूचना मिली कि नजदीकी दूसरे शहर में एक छोटा बच्चा मिला है जो लगभग 3 साल का है।

सबकी आँखे उम्मीद से जगमागने लगी कि हो न हो वो बच्चा अपना छोटू ही है जो किसी प्रकार वहाँ चला गया होगा। तुरंत ही दूसरे शहर के लिए लोग निकल पड़े। कुछ घण्टो की दूरी कई बर्षों जितना लम्बा लग रहा था। खैर, धड़कते हुए दिल के साथ जब लोग उस बच्चे से मिले तो पता चला कि ये अपना छोटू नहीं है। अब तो बुरे ख्याल भी मन में आने लगे, ” कहीं कोई चुरा तो नहीं लिया?, कोई दुश्मन तो नही उठा ले गया?, किसी ने अपहरण तो नहीं कर लिया? “
पुलिस अब तक आस पास के घरों में देख चुकी थी कि किसके किसके यहाँ सीसीटीवी कैमरा लगा है। अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर खोजबीन शुरू हुआ।
आखिरकार एक कैमरे में छोटू नज़र आया। वो अपने हमउम्र 2 और बच्चों के साथ जा रहा था। फिर उसी कैमरे से पता चला कि जाने वाले तो 3 बच्चे थे परंतु वापस सिर्फ2 ही बच्चे आये। अब तो सभी लोगों के कान खड़े हो गए कि ये बच्चे जरूर जानते होंगे कि छोटू कहाँ है? पुलिस उन बच्चों से पूछताछ करने पहुँची परन्तु उन बच्चों के अभिभावक पुलिस से डर कर बच्चा देने को तैयार नहीं हो रहे थे। थानेदार के समझाने पर कि उनके बच्चों को कुछ नहीं होगा, बच्चों के गार्जियन ने बच्चों को बाहर बुलाया। बच्चों से पूछताछ शुरू हुआ। वो बच्चे एक ऐसे स्थान पर लेकर गए जहाँ एक गड्ढा खोदकर नाला बनाया गया था। गड्ढा करीब 8-10 फिट गहरा था। बच्चे बोले हमलोग यहीं पर खेल रहे थे। अब सबकी निगाहें गड्ढे की तरफ हो गई। मामाजी और बच्चे के अंकल जी तुरंत गड्ढे में उतरे। लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला। सब लोग बाहर निकल आये। लगभग आधे घंटे बाद जब पानी स्थिर हुआ उसी नाले में उस बच्चे को पाया गया।।
सारी उम्मीदें, सारी आशाएं तुरंत ही घोर निराशा में तब्दील हो गई।

भगवान उस बच्चे की आत्मा को शांति प्रदान करें, और उसके परिवार जनों को इस मुश्किल वक्त से निकलने का हिम्मत दें।

दया शंकर गुप्ता
प्रा 0 वि 0 देवरिया
मोहनियां, कैमूर

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