2047: मेरे सपनो का भारत-कुमकुम कुमारी "काव्याकृति" - गद्य गुँजन

2047: मेरे सपनो का भारत-कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”

Kumkum

2047: मेरे सपनो का भारत

चारों ओर खुशहाली होगी,
न भ्रष्टाचार न बेरोजगारी होगी।
सुंदर अपना देश बनेगा,
विश्व का मार्ग प्रशस्त करेगा।

         आज हमारे देश भारत को स्वतंत्र हुए लगभग 75 वर्ष पूरे हो गए। आज पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है और अगले 25 वर्ष हमारे लिए अमृत वर्ष होगा। लगभग 200 वर्षों की गुलामी की त्रासदी को सहने के पश्चात् भारत को 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजादी मिली। 1947 से लेकर अब तक हमारा देश भारत प्रगति के पथ पर अग्रसर है किंतु अभी भी भारत को अपनी पुरानी पहचान “सोने की चिड़ियां” को प्राप्त करना बांकी है। पूरे दुनियां में ज्ञान का अलख जगाने वाला हमारा प्यारा देश भारत को एक बार पुनः विश्वगुरु बनते देखने का सपना हमारे नैनों ने सजाए रखा है।

2047 में जब हम आजादी का शताब्दी समारोह मना रहे होगें, निश्चय ही हमारा देश भारत विश्व के महानतम देश में शुमार होगा। अपनी सनातनी सभ्यता एवं संस्कृति से दुनियां को पाठ पढ़ा रहा होगा। सारी दुनियां नतमस्तक हो हमारे भारत देश को नमन कर रहे होगें। विश्वबंधुत्व का पाठ पढ़ा पूरी दुनियां में मानवता का दीप जलाने वाला भारत का हर एक नागरिक चरित्रवान, विद्वान एवं सृजनात्मक प्रवृति का होगा। हमारा प्यारा देश भारत शिक्षा के पौराणिक पद्धति को अपनाकर शिक्षा के मूल उद्देश शिक्षार्थी को विद्यावान बना एक नहीं कई विवेकानंद तैयार करके दुनियां के कोने-कोने से बैर वैमनस्य को खत्म कर सुंदर जग के निर्माण में सहायक होगा।हमारे देश में शिक्षा का ऐसा विस्तार हो ताकि भारत का हर एक नागरिक पूर्ण शिक्षित हो। कोई भी बालक या बालिका शिक्षा विहिन न हो।

2047 तक हमारा प्यारा देश भारत ऐसा सुंदर भारत बने जिसमें न कोई दुखी और न कोई परेशान हो।योग्यता का पूर्ण विस्तार हो। नर नारी दोनों एक समान हो। प्राकृतिक संपदा का विस्तार हो। पशु-पक्षी का सुंदर संसार हो। पेय जल का न अकाल हो। खेतों में खुशहाली हो। किसानों की न्यारी न्यारी हो। गांवों में भी हर सुविधा विद्यमान हो। जन जन यहां का इंसान हो। भ्रष्टाचार और घूसखोरी का नामोनिशान न हो। भगवान करे हमारा सपना साकार हो। 2047 में भारत के माटी का कण-कण चंदन हो। मानवों का अभिनंदन हो और प्रकृति का संवर्धन हो।

जय भारत जय भारती🙏
कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”
मुंगेर, बिहार

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