स्टेशन पर कदम रखते ही सुधीर को लगा कि मानो यहाँ पहले आ चुका है।हालाँकि वह पहली बार इस शहर में कदम रखा था और वह भी इतने दूर इस छोटे शहर में वह कभी नही आता अगर उसका इंटरव्यू नही होता।
स्टेशन से बाहर निकलने पर वह अंजान शहर उसे अनजान नही महसूस हो रहा था मानो उसका पहले से रिश्ता हो।
रात के 12 बज रहे थे ट्रेन पूरे 3 घण्टे देरी से पहुँची थी।बाहर एक भी रिक्शा ,ऑटो या कोई गाड़ी नही दिख रही थी।सुधीर सोच रहा था कि वह होटल कैसे जाएगा।
तभी एक बुजुर्ग अपनी मोटरसाइकिल से उसके पास से गुजरे और उसको देखकर रुक गए।उन्होंने उसके हाथ में एक बैग देखकर पूछा बेटा कहाँ जाना है ,इस समय तो कोई गाड़ी नही मिलेगी,अब सुबह 4 बजे ही मिलेगी।
सुधीर परेशान होकर बोला मुझे होटल जाना है सुबह 7बजे मेरा एग्जाम है।
तब उस बुजुर्ग ने कहा चलो मेरे साथ मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ।सुधीर को पहले डर लगा फिर इस अनजान शहर में वह बुजुर्ग अंकल ही एकमात्र उम्मीद दिखें।
उनके साथ जाने पर रास्ते में वह जिद करने लगे और अपने घर ले गए।सुबह एग्जाम दिलाने भी ले गए।
उस अनजान शहर में वह अपने से भी बढ़कर मिलें।
तभी सुधीर को स्टेशन पहुँचते ही वह शहर अनजान नही लगा।
रूचिका
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान