चाची वो चाची,रेखा कहाँ है?यह कहते हुए सुधा जब रेखा के घर में प्रवेश करती है तो देखती है कि रेखा तवे पर रोटियाँ पलट रही है।
उसे ऐसे देख सुधा आश्चर्य चकित होकर रेखा को देखती है और पूछती है कि तुम अभी तक तैयार नही हुई?
स्कूल नही जाना है क्या,पता है न आज स्कूल में मासिक टेस्ट है?रेखा चुप रहती है,तभी उसकी माँ बोलती है सुधा बिटिया तुम जाओ स्कूल,आज रेखा स्कूल नही जाएगी।
सुधा कहती है,मगर क्यों चाची?आज तो स्कूल जाना बहुत जरूरी है,रेखा मासिक टेस्ट नही छोड़ सकती।
इसका नंबर वार्षिक परीक्षा में जोड़ा जाता है और उसके आधार पर ही वर्ष भर का रिजल्ट बनता है।
रेखा की मम्मी कहती हैं अरे बिटिया ये सब हमको नही समझ आता,बस इतना समझ आता कि ये नही देने से कोई नौकरी नही छूटने वाला जो तुम परेशान हो रही।
तुमको जाना है तो तुम जाओ,मगर रेखा आज स्कूल नही जाएगी।
घर में कितने काम है,मैं अकेले कितना काम संभालू,घर देखूँ या बाहर।
मुझे अभी खेत में जाना है घर में रहनेवाला भी तो कोई चाहिए।सुधा का मुंह बंद हो जाता है और रेखा की आँखो में आँसू आ जाते हैं।
तभी उसकी बूढ़ी दादी लाठी टेकते हुए बाहर निकलती हैं और कहती हैं जा रे रेखवा स्कूल जा।
घर में रहके का करबे।ईंट देखबे का।
हम सब सम्भार लिहम।
और सुधा से कहती हैं मन लगाकर पढ़ो तुम दोनों।जो हमने किया वह तुमलोग मत करना।
काम तो सारी उम्र करना है,पर अभी पढ़ना जरूरी है।
पढ़ लिख कर आत्मनिर्भर बनो ताकि आनेवाली पीढ़ी को शिक्षित बना सको।
रूचिका
प्रधान शिक्षक
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार