स्टेशन पर कदम रखते ही सुधीर को लगा कि मानो यहाँ पहले आ चुका है।हालाँकि वह पहली बार इस शहर[...]
Category: हिन्दी कहानी
पढ़ो बिटिया : रूचिकापढ़ो बिटिया : रूचिका
चाची वो चाची,रेखा कहाँ है?यह कहते हुए सुधा जब रेखा के घर में प्रवेश करती है तो देखती है कि[...]
प्रतिभा को अवसर : रूचिकाप्रतिभा को अवसर : रूचिका
मनोहर और श्याम जब मिलते खेल में लग जाते, उन्हें खेलने के लिए किसी विशेष खिलौनों की जरूरत नही पड़ती।जो[...]
धूप, टोकरी और जीवन की जद्दोजहद : स्मिता ठाकुरधूप, टोकरी और जीवन की जद्दोजहद : स्मिता ठाकुर
स्कूल से लौटते वक्त रोज की तरह लोहिया चौक सुपौल पर ढाला गिरा हुआ था मतलब ट्रेन गुजरने वाली थी[...]
मैं कर सकती हूँ : रूचिकामैं कर सकती हूँ : रूचिका
आज हर दिन की भाँति ही मैं जब स्कूल पहुँची तो कुछ सूना सूना सा लगा। काजल जो कक्षा 3[...]
जहां चाह , वहां राह : डॉ स्नेहलता द्विवेदीजहां चाह , वहां राह : डॉ स्नेहलता द्विवेदी
शहर की तंग गलियों का मुहल्ला हुसैन पूर । यहाँ के अधिकतर बाशिंदे मुसलमान थे ।तंग गलियों के अंदर कई[...]
उल्लू बनाया बड़ा मज़ा आया : नीतू रानीउल्लू बनाया बड़ा मज़ा आया : नीतू रानी
विषय -सच्ची कहानी (गद्य गुंजन)।शीर्षक -उल्लू बनाया बड़ा मज़ा आया। सुषमा शादी कर पहली बार अपना ससुराल आती है तो[...]
खुशियों का गुल्लक : रूचिकाखुशियों का गुल्लक : रूचिका
दस वर्षीय राहुल मेले से खरीदे गुल्लक में रोज सिक्के डालता था। कभी 1₹, कभी 2₹, कभी 5₹, कभी 10₹।[...]
सिरपंचमी का हल : अरविंद कुमारसिरपंचमी का हल : अरविंद कुमार
गुनगुनी धूप, मंद हवा, मौसम का नशा प्रेम की अगन को और भड़काता है। यौवन अंगड़ाई लेने लगती हैं। तापमान[...]
रेनुअल न्यू ईयर : अरविंद कुमाररेनुअल न्यू ईयर : अरविंद कुमार
“ना अब उ सब काम नहीं करेंगे…। बिल्कुल नहीं……..। एकदम कन्ट्रोल…।” दफ्तर के बड़ा बाबू रमेश वर्मा मन ही मन[...]